दो मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार
पुलिस का बड़ा खुलासा
बेलगावी. ‘वर्क फ्रॉम होम’ नौकरी और सरकारी लोन दिलाने का झांसा देकर आम लोगों के नाम पर बैंक खाते खुलवाकर उन्हें साइबर ठगी में इस्तेमाल करने वाले एक बड़े संगठित गिरोह का भंडाफोड़ बेलगावी शहर की साइबर अपराध पुलिस ने किया है। इस कार्रवाई में दो मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है, जबकि जांच में 72 बैंक खातों के जरिए देशव्यापी ठगी का चौंकाने वाला नेटवर्क सामने आया है।
पुलिस के अनुसार, 22 फरवरी 2026 को दर्ज एक शिकायत की जांच के दौरान इस गिरोह का पर्दाफाश हुआ। शिकायतकर्ता कुमारी मानसी चव्हाण को परिचित मेघा मारडोलकर ने ‘वर्क फ्रॉम होम’ नौकरी और लोन सुविधा दिलाने का भरोसा दिलाया था। इसी बहाने उनसे और अन्य लोगों से बैंक खाते खुलवाए गए, लेकिन न तो नौकरी मिली और न ही लोन। बाद में इन खातों का इस्तेमाल साइबर धोखाधड़ी के लिए किया गया।
जांच के दौरान पुलिस ने 24 फरवरी को कोर्ट से सर्च वारंट लेकर मेघा मारडोलकर के घर पर छापा मारा। पूछताछ में सामने आया कि उसने बेलगावी के कई निर्दोष लोगों के नाम पर विभिन्न बैंकों में 72 खाते खुलवाए थे। इन खातों से जुड़े दस्तावेज ट्रैवल्स पार्सल के जरिए मुंबई निवासी हैदरअली गुलामअली उजैनवाला को भेजे जाते थे।
पुलिस जांच में खुलासा हुआ कि हैदरअली अपने बेटे इदरीस अली, सहयोगी अजीज बोरा और मेघा की बेटी शिवानी मारडोलकर के साथ मिलकर देशभर में साइबर अपराध का नेटवर्क चला रहा था। इसके बाद पुलिस ने 22 मार्च को मुंबई में हैदरअली को हिरासत में लेकर पूछताछ की और बाद में उसे गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया।
इसी मामले में मेघा मारडोलकर को 26 मार्च को गोवा के पूर्वी क्षेत्र से हिरासत में लिया गया और 27 मार्च को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। दोनों आरोपी फिलहाल जेल में हैं।
जांच का सबसे बड़ा खुलासा यह रहा कि 72 खातों में से 47 खातों के खिलाफ 1930 हेल्पलाइन और एनसीसीआरपी पोर्टल पर कुल 144 मामले दर्ज हैं। इन्हीं खातों में करीब 1.27 करोड़ रुपए की ठगी की रकम जमा होने का पता चला है। इससे यह स्पष्ट हुआ कि बेलगावी से संचालित यह नेटवर्क देशव्यापी साइबर ठगी का एक महत्वपूर्ण कड़ी था।
यह मामला दर्शाता है कि किस तरह नौकरी और लोन का झांसा देकर आम नागरिकों के बैंक खातों को ही अपराध का माध्यम बनाया जा रहा है। पुलिस ने लोगों से अपील की है कि वे इस प्रकार के लालच से सतर्क रहें और किसी भी अनजान व्यक्ति के कहने पर बैंक खाते या दस्तावेज साझा न करें।
यह सफल कार्रवाई पुलिस आयुक्त और उप पुलिस आयुक्त (कानून-व्यवस्था) के मार्गदर्शन में सहायक पुलिस आयुक्त बी.एस. मंटूर, निरीक्षक एस.एन. गाची और साइबर क्राइम टीम द्वारा की गई, जिसकी अधिकारियों ने सराहना की है।
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