भीषण गर्मी से बेहाल जनजीवन, पानी के लिए जद्दोजहद
इंसानों के साथ पशु-पक्षी भी प्रभावित
कुकनूर (कोप्पल). मार्च माह की शुरुआत के साथ ही कुकनूर और कोप्पल जिले में भीषण गर्मी ने जनजीवन को अस्त-व्यस्त कर दिया है। तापमान में लगातार बढ़ोतरी से लोगों का घर से बाहर निकलना मुश्किल हो गया है। हालात ऐसे हैं कि खड़े रहना भी कठिन हो रहा है और पंखे चलने के बावजूद राहत नहीं मिल रही।
स्वास्थ्य पर दिख रहा असर
तेज गर्मी का असर बच्चों, बुजुर्गों और बीमार लोगों पर अधिक देखने को मिल रहा है। बुखार, उल्टी, दस्त और चक्कर जैसी समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं। चिकित्सकों के अनुसार, कम पानी पीने से डिहाइड्रेशन का खतरा बढ़ रहा है, जो गंभीर रूप ले सकता है।
मार्च के अंतिम सप्ताह में जिले का अधिकतम तापमान 36 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया, जो आगे और बढऩे की आशंका है।
ताजगी की तलाश, महंगा हुआ नारियल पानी
गर्मी से राहत पाने के लिए लोग नारियल पानी, छाछ, जूस और तरबूज जैसे फलों का सहारा ले रहे हैं। बाजार में नारियल पानी की कीमत बढक़र 50 रुपए तक पहुंच गई है। कई स्थानों पर इसकी कमी भी देखने को मिल रही है।
कुकनूर, कोप्पल, गंगावती, कुष्टगी, कनकगिरी और यलबुर्गा क्षेत्रों में ठंडे पेय पदार्थों की मांग तेजी से बढ़ी है।
रोजी-रोटी पर भी असर
भीषण गर्मी के बावजूद फल, सब्जी और फूल बेचने वाले, सडक़ किनारे व्यापारी और एपीएमसी के मजदूर अपनी आजीविका के लिए कड़ी धूप में काम करने को मजबूर हैं। उनके लिए यह मौसम स्वास्थ्य और रोजगार दोनों की दोहरी चुनौती बन गया है।
पशु-पक्षियों के लिए भी संकट
गर्मी का असर केवल इंसानों तक सीमित नहीं है। पशु-पक्षियों को भी पानी और छांव के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है। इस स्थिति को देखते हुए कई सामाजिक संगठन सार्वजनिक स्थानों पर पानी की व्यवस्था (जल सेवा केंद्र) शुरू कर रहे हैं, जिससे लोगों और पशुओं को राहत मिल सके।
रोजी-रोटी के लिए तपती धूप में काम मजबूरी
गर्मी बहुत ज्यादा है। पेड़ की छांव में बैठने पर भी राहत नहीं मिलती, लेकिन पेट पालने के लिए हमें इसी तेज धूप में काम करना पड़ता है।
–कमलम्मा, फूल विक्रेता
बच्चों का विशेष ध्यान रखें
गर्मी का असर शुरू हो चुका है। बच्चों में तेज बुखार और स्वास्थ्य में उतार-चढ़ाव देखा जा रहा है। अभिभावकों को बच्चों का विशेष ध्यान रखना चाहिए।
–मंजुनाथ चकनकोप्पा, बाल रोग विशेषज्ञ
गर्भवती महिलाएं और बुजुर्ग रहें सतर्क
जिलेभर में तेज धूप और गर्मी की तीव्रता बढ़ी है। गर्भवती महिलाएं, प्रसूता, बच्चे और बुजुर्ग अपने स्वास्थ्य को लेकर विशेष सावधानी बरतें।
–डॉ. लिंगराज टी., जिला स्वास्थ्य अधिकारी (डीएचओ), कोप्पल
पशुओं पर भी बढ़ा खतरा
तेज गर्मी के कारण पशुओं के स्वास्थ्य और उनकी उत्पादकता पर असर पड़ सकता है। पशुपालकों को उनकी सुरक्षा के लिए जरूरी एहतियाती कदम उठाने चाहिए।
–डॉ. पी.एम. मल्लय्या, उपनिदेशक, पशुपालन एवं पशु चिकित्सा सेवा विभाग
स्वास्थ्य विभाग की सलाह
दिनभर पर्याप्त मात्रा में पानी, छाछ और फलों का रस पिएं
हल्के रंग और ढीले सूती कपड़े पहनें
दोपहर 11 बजे से शाम 4 बजे तक धूप से बचें
धूप में निकलते समय छाता, टोपी और चश्मे का उपयोग करें
अत्यधिक मेहनत वाले काम से बचें
चाय, कॉफी और मीठे कार्बोनेटेड पेय कम लें
पशुपालन विभाग की चेतावनी
पशुओं को सुबह-शाम ही चरने के लिए छोड़ें
दिन में 2-3 बार स्वच्छ पानी पिलाएं
शरीर पर पानी डालकर तापमान नियंत्रित रखें
पशुशालाओं को ठंडा रखने के उपाय करें
निर्जलीकरण की स्थिति में नमक, गुड़ और नींबू मिला पानी दें
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