हिंदी के अंकों की जगह ग्रेड प्रणाली पर विवाद तेजशिक्षाविद् उमेश पुरोहित।

छात्रों और शिक्षकों में रोष, अंक प्रणाली बहाल करने की मांग

हिंदी को राष्ट्रीय एकता की भाषा

हुब्बल्ली. कर्नाटक में विद्यालयी शिक्षा के तहत लागू त्रिभाषा फार्मूले में हिंदी और अन्य प्रादेशिक भाषाओं के मूल्यांकन को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है। राज्य सरकार की ओर से हाल ही में हिंदी समेत अन्य भाषाओं में अंक (माक्र्स) के स्थान पर ग्रेड प्रणाली लागू करने के निर्णय का छात्रों और शिक्षकों ने विरोध किया है। उनका कहना है कि यह व्यवस्था उनके शैक्षणिक और भविष्य के हितों के खिलाफ है।

हिंदी राष्ट्रीय एकता की कड़ी

हिंदी को देश की सबसे प्रमुख संपर्क भाषा और राष्ट्रीय अस्मिता का प्रतीक माना जाता है। देश की 43 प्रतिशत से अधिक आबादी द्वारा बोली जाने वाली यह भाषा शिक्षा, प्रशासन, मीडिया और डिजिटल मंचों पर व्यापक रूप से उपयोग में लाई जा रही है। हिंदी न केवल सांस्कृतिक एकता को मजबूत करती है, बल्कि यह ज्ञान-विज्ञान और रोजगार के अवसरों का भी महत्वपूर्ण माध्यम बनती जा रही है।

कर्नाटक में हिंदी की बढ़ती मांग

कर्नाटक में दशकों से त्रिभाषा फार्मूला लागू है, जिसके तहत विद्यार्थियों को हिंदी सीखने का अवसर मिलता रहा है। स्वतंत्रता संग्राम के दौरान भी राज्य के सेनानियों ने हिंदी को माध्यम बनाकर राष्ट्रीय आंदोलन में भागीदारी निभाई थी। वर्तमान में भी राज्य के छात्रों में हिंदी सीखने की रुचि बढ़ रही है, क्योंकि उच्च शिक्षा और रोजगार के लिए अन्य राज्यों में जाने पर हिंदी का ज्ञान उपयोगी साबित होता है।

ग्रेड प्रणाली पर उठे सवाल

विशेषज्ञों का मानना है कि ग्रेड प्रणाली से छात्रों की वास्तविक शैक्षणिक क्षमता का सही आकलन नहीं हो पाता। साथ ही, अन्य राज्यों में उच्च शिक्षा के लिए आवेदन करते समय अंक आधारित मूल्यांकन अधिक मान्य होता है। इससे छात्रों को प्रतिस्पर्धा में नुकसान उठाना पड़ सकता है।

शिक्षकों के रोजगार पर भी संकट

इस बदलाव से हिंदी और अन्य प्रादेशिक भाषा के शिक्षकों के रोजगार पर भी असर पडऩे की आशंका जताई जा रही है। शिक्षकों का कहना है कि यदि भाषाओं का महत्व कम किया गया, तो भविष्य में इन विषयों की मांग घट सकती है।

सरकार से पुनर्विचार की मांग

धारवाड़ स्थित शिक्षाविद् उमेश पुरोहित ने राज्य सरकार से आग्रह किया है कि हिंदी और अन्य भाषाओं के लिए ग्रेड प्रणाली को समाप्त कर पूर्व की अंक प्रणाली को बहाल किया जाए। उनका कहना है कि हिंदी केवल भाषा नहीं, बल्कि देश को एक सूत्र में बांधने वाली शक्ति है, इसलिए इसके महत्व को कम नहीं करना चाहिए।

 

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By Bharat Ki Awaz

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