सीएम सिद्धरामय्या का जेडीएस पर तीखा प्रहार
परिवारवाद पर सियासी घमासान
कुमारस्वामी को घेरा
दावणगेरे में दिखी कांग्रेस की एकजुटता
दावणगेरे. कर्नाटक की राजनीति में परिवारवाद को लेकर एक बार फिर सियासी संग्राम तेज हो गया है। मुख्यमंत्री सिद्धरामय्या ने सोमवार को जेडीएस और उसके नेता एचडी. कुमारस्वामी पर जोरदार हमला बोलते हुए कहा कि लोकतंत्र में जनता की इच्छा सर्वोपरि होती है, लेकिन जनता द्वारा नकारे जाने के बाद भी परिवारवाद को बढ़ावा देना उचित नहीं है।
“जनता ने नकारा, फिर भी नहीं बदले”
सिद्धरामय्या ने पत्रकारों से बातचीत करते हुए कहा कि जेडीएस पूरी तरह परिवार केंद्रित पार्टी बन चुकी है। उन्होंने आरोप लगाया कि पूर्व प्रधानमंत्री एचडी. देवगौड़ा के परिवार के कई सदस्य सक्रिय राजनीति में हैं, जो पार्टी की कार्यशैली को दर्शाता है।
उन्होंने चन्नपट्टण उपचुनाव का जिक्र करते हुए कहा कि कुमारस्वामी के पुत्र को जनता ने स्वीकार नहीं किया, फिर भी उन्होंने कोई सबक नहीं सीखा।
जेडीएस की गिरती ताकत पर सवाल
सीएम ने कहा कि 2004 में जब वे जेडीएस के प्रदेश अध्यक्ष थे, तब पार्टी ने 59 सीटें जीती थीं, लेकिन 2023 आते-आते यह संख्या घटकर 19 रह गई। उन्होंने आरोप लगाया कि अस्तित्व बचाने के लिए जेडीएस ने भाजपा के साथ हाथ मिला लिया है।
सोमन्ना और भाजपा पर भी निशाना
केंद्रीय रेल राज्य मंत्री वी. सोमन्ना के निमंत्रण पर तंज कसते हुए सीएम ने कहा कि उनके पास स्वतंत्र अधिकार ही नहीं हैं, उनके पास फाइलें तक नहीं आतीं, फिर उनके कार्यालय जाकर क्या करना?
इसके साथ ही उन्होंने भाजपा पर भी विकास कार्यों में विफल रहने का आरोप लगाया।
दावणगेरे में कांग्रेस की ‘दोस्ती’ की तस्वीर
दावणगेरे दक्षिण उपचुनाव के बीच कांग्रेस में दिख रही अंदरूनी खींचतान अब खत्म होती नजर आ रही है।
पहले टिकट को लेकर आमने-सामने रहे मंत्री एसएस. मल्लिकार्जुन और जमीर अहमद खान अब एक मंच पर आकर कांग्रेस उम्मीदवार समर्थ शामनूर के समर्थन में प्रचार कर रहे हैं। दोनों नेताओं ने सार्वजनिक रूप से गले मिलकर एकजुटता का संदेश दिया।
‘बेण्णे डोसा’ के साथ सियासी संदेश
प्रचार के दौरान मुख्यमंत्री सिद्धरामय्या ने दावणगेरे की प्रसिद्ध बेण्णे (मक्खन) डोसा का स्वाद भी लिया। उन्होंने सोशल मीडिया पर पोस्ट करते हुए लिखा कि दावणगेरे आकर बेण्णे डोसा का स्वाद न लें, तो मन कैसे माने? यह सिर्फ भोजन नहीं, एक अनुभव है।
सीएम की यह तस्वीर सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही है। जहां कुछ लोग इसे सहज क्षण बता रहे हैं, वहीं विपक्ष इसे चुनावी स्टंट करार दे रहा है।
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