मानसून की मार: कहीं बाढ़, कहीं सूखामानसून की मार: कहीं बाढ़, कहीं सूखा

178 तालुकों में सूखे जैसे हालात, 627 होबलियों में बारिश का इंतजार

तटीय क्षेत्रों में नदियां उफान पर, उत्तर कर्नाटक में सूखने लगीं फसलें

हुब्बल्ली. कर्नाटक में इस वर्ष मानसून का असमान वितरण किसानों के लिए बड़ी चिंता बन गया है। राज्य के एक हिस्से में लगातार हो रही बारिश से नदियां उफान पर हैं और जलाशय भर रहे हैं, जबकि दूसरे हिस्से में वर्षा के अभाव से फसलें सूखने लगी हैं। इस असंतुलित मानसून ने राज्य में एक साथ बाढ़ और सूखे जैसे हालात पैदा कर दिए हैं।

तटीय और मलेनाडु में झमाझम बारिश

उडुपी, दक्षिण कन्नड़, उत्तर कन्नड़, शिवमोग्गा, चिक्कमगलूरु और कोडगु जिलों में लगातार वर्षा हो रही है। कावेरी, तुंगा, भद्रा, नेत्रावती और शरावती नदियों का जलस्तर बढ़ गया है तथा जलाशयों में पानी की आवक तेज हुई है। इन क्षेत्रों में किसान धान की रोपाई और अन्य कृषि कार्यों में व्यस्त हैं।

बेलगावी और चिक्कोडी क्षेत्र में महाराष्ट्र के पश्चिमी घाट में भारी बारिश के कारण कृष्णा, दूधगंगा और वेदगंगा नदियों में जलप्रवाह बढ़ गया है। कृष्णा नदी में लगभग 60 हजार क्यूसेक पानी बह रहा है, जिससे चार निचले स्तर के पुल जलमग्न हो गए हैं।

उत्तर कर्नाटक में गहराया सूखे का संकट

दूसरी ओर विजयपुर, बागलकोट, रायचूर, कोप्पल, गदग, तुमकूरु और कोलार सहित कई जिलों में वर्षा की भारी कमी से खरीफ फसलें प्रभावित हुई हैं। सामान्य से कम बारिश के कारण लाखों हेक्टेयर क्षेत्र में बुवाई प्रभावित हुई है और बोई गई फसलें सूखने लगी हैं। कई गांवों में पेयजल संकट भी गहराने लगा है।

गदग जिले के सातों तालुकों में वर्षा नहीं होने से मूंग, मूंगफली और मक्का की फसलें सूख रही हैं। गंगिमडी क्षेत्र के एक किसान ने कर्ज लेकर बोई गई 40 एकड़ मूंग की फसल खुद ही नष्ट कर दी। किसान जिले को तत्काल सूखाग्रस्त घोषित करने की मांग कर रहे हैं।

कहीं बारिश से राहत, कहीं किसानों का आक्रोश

कलबुर्गी और यादगीर में आंधी के साथ हुई बारिश से तुअर, कपास और मूंग की फसलों को राहत मिली है। कोलार में भी लंबे अंतराल के बाद हुई बारिश से किसानों ने राहत की सांस ली।

चिक्कबल्लापुर में बारिश की कमी के साथ टमाटर के गिरते दामों ने किसानों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। उचित मूल्य नहीं मिलने से एक किसान ने अपनी टमाटर की उपज सडक़ पर फेंककर विरोध जताया। चित्रदुर्ग जिले के गोपनहल्ली गांव में अच्छी वर्षा की कामना के लिए ग्रामीणों ने पारंपरिक रूप से गधों का विवाह कर विशेष पूजा-अर्चना की।

178 तालुकों में सूखे जैसी स्थिति

सरकारी आंकड़ों के अनुसार राज्य के 178 तालुकों में सूखे जैसी स्थिति बन गई है, जबकि 627 होबलियों में पर्याप्त वर्षा नहीं हुई है। क्षेत्रवार वर्षा की कमी में मलेनाडु में 43 प्रतिशत, तटीय कर्नाटक में 35 प्रतिशत, उत्तर आंतरिक कर्नाटक में 33 प्रतिशत और दक्षिण आंतरिक कर्नाटक में 31 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है।

कृषि एवं राजस्व विभाग स्थिति पर नजर रखे हुए हैं। विशेषज्ञ किसानों को वैकल्पिक फसलों की सलाह दे रहे हैं। मौसम वैज्ञानिकों का मानना है कि जलवायु परिवर्तन और एल-नीनो के प्रभाव से वर्षा का वितरण असंतुलित हो रहा है। यदि आने वाले दिनों में पर्याप्त वर्षा नहीं हुई तो राज्य के कई हिस्सों में पेयजल और कृषि संकट और गहरा सकता है।

 

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By Bharat Ki Awaz

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