कुंदापुर के हक्लाडी में राज्य में सर्वाधिक 189 मिमी वर्षा दर्ज
जिले की वर्षा कमी काफी हद तक हुई दूर
उडुपी। पुष्य नक्षत्र की बारिश ने उडुपी जिले के लिए राहत लेकर आई है। पिछले 36 घंटों में हुई मूसलाधार वर्षा से जिले में लंबे समय से बनी वर्षा की कमी काफी हद तक दूर हो गई है। 4 अगस्त तक के आंकड़ों के अनुसार अगस्त माह के शुरुआती चार दिनों में जिले में सामान्य से 61 प्रतिशत अधिक वर्षा दर्ज की गई है। वहीं, कुंदापुर तालुक के हक्लाडी में 189 मिमी वर्षा रिकॉर्ड की गई, जो पूरे कर्नाटक में सर्वाधिक रही।
39 प्रतिशत वर्षा घाटा हुआ कम
जून में जिले में 50 प्रतिशत और जुलाई के अंत तक 39 प्रतिशत वर्षा की कमी दर्ज की गई थी। हालांकि, 1 से 4 अगस्त के बीच सामान्य 171 मिमी के मुकाबले 275 मिमी वर्षा होने से सूखे जैसे हालात में काफी सुधार हुआ है। फिर भी पूरे मानसून सीजन में अब तक 2,725 मिमी के सामान्य औसत के मुकाबले केवल 1,891 मिमी वर्षा हुई है, जो पिछले वर्ष की तुलना में 31 प्रतिशत कम है।
कई जिलों में भी जोरदार बारिश
राज्य आपदा प्रबंधन केंद्र के अनुसार अगस्त की शुरुआत में तटीय और मलनाड क्षेत्रों में वर्षा तेज हुई है। दक्षिण कन्नड़ में 76 प्रतिशत, उत्तर कन्नड़ में 69 प्रतिशत, चिक्कमगलूरु में 82 प्रतिशत, शिवमोग्गा में 84 प्रतिशत, कोडगु में 61 प्रतिशत, हासन में 29 प्रतिशत, रायचूर में 26 प्रतिशत तथा बेलगावी में 33 प्रतिशत अधिक वर्षा दर्ज की गई।
हक्लाडी सबसे आगे, कई क्षेत्रों में 170 मिमी से अधिक बारिश
पिछले 24 घंटों के दौरान राज्य में सर्वाधिक वर्षा हक्लाडी (189 मिमी) में दर्ज की गई। इसके बाद आगुम्बे (170 मिमी) और दक्षिण कन्नड़ के शिर्ताडी (133.5 मिमी) का स्थान रहा। उडुपी जिले के हेब्री, हेंगवल्ली-अंपारू, चित्तूर, माळ, नाडपालु, नाडा, मोलहल्ली, नीरे तथा हार्दल्ली-मंडल्ली-बसरूर सहित कई क्षेत्रों में 140 से 170 मिमी तक वर्षा रिकॉर्ड की गई।
जिले में औसत वर्षा 104.4 मिमी रही। कुंदापुर में 135.6 मिमी, हेब्री में 126.2 मिमी, कार्कल में 97.7 मिमी, बयंदूर में 97 मिमी, उडुपी में 82.3 मिमी, ब्रह्मावर में 76.6 मिमी तथा कापू में 57.2 मिमी वर्षा दर्ज की गई।
कृषि गतिविधियों को नई ऊर्जा
4 अगस्त की सुबह से दोपहर तक तेज बारिश हुई, हालांकि दोपहर बाद इसकी तीव्रता कम हो गई। 5 अगस्त को अपेक्षित वर्षा नहीं हुई, लेकिन आने वाले दिनों में अच्छी बारिश की उम्मीद है। पुष्य नक्षत्र की वर्षा ने कृषि गतिविधियों को नई ऊर्जा और मजबूती प्रदान की है।
–हरिप्रसाद शेट्टी, किसान नेता, सौड
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