अब ‘फ्रूट्स आईडी’ जरूरी, तभी मिलेगा खाद और सरकारी सहायतासांदर्भिक फोटो।

करावली में 4.30 लाख किसानों का पंजीकरण

उडुपी और दक्षिण कन्नड़ जिले आगे

अब हर किसान के लिए जरूरी पहचान

कुंदापुर (उडुपी). कृषि क्षेत्र में पारदर्शिता और सरकारी योजनाओं का लाभ सीधे किसानों तक पहुंचाने के उद्देश्य से लागू की गई ‘फ्रूट्स आईडी’ (एफआईडी) प्रणाली को करावली क्षेत्र में व्यापक समर्थन मिल रहा है। अब तक उडुपी और दक्षिण कन्नड़ जिलों में कुल 4.30 लाख किसानों ने इस विशेष पहचान संख्या के तहत पंजीकरण कराया है।

उडुपी जिले में 2.64 लाख और दक्षिण कन्नड़ में 1.66 लाख किसानों ने एफआईडी बनवाया है, जिससे यह योजना तेजी से जमीन पर लागू होती दिख रही है।

क्या है एफआईडी?

एफआईडी (किसान पंजीकरण और एकीकृत लाभार्थी सूचना प्रणाली) एक डिजिटल पहचान प्रणाली है, जिसे कृषि और बागवानी विभाग ने लागू किया है। इसके माध्यम से किसानों को सरकारी योजनाओं का लाभ एक ही प्लेटफॉर्म पर आसानी से मिल सकेगा।

पंजीकरण के लिए किसानों को आधार कार्ड, बैंक पासबुक की प्रति, जमीन के दस्तावेज (आरटीसी), मोबाइल नंबर और फोटो देना आवश्यक है। यह प्रक्रिया किसान संपर्क केंद्र, कृषि विभाग, बागवानी, पशुपालन, रेशम विभाग या नागरिक सेवा केंद्रों में पूरी की जा सकती है।

क्या मिलेंगे फायदे?

एफआईडी के जरिए किसान फसल बीमा और मुआवजा, सूखा राहत सहायता, कृषि, बागवानी, पशुपालन, रेशम और केएमएफ योजनाओं का लाभ, सरकारी सब्सिडी और अन्य सहायता प्राप्त कर सकेंगे।

सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि एक बार एफआईडी बनने के बाद किसानों को बार-बार दस्तावेज लेकर जाने की जरूरत नहीं होगी।

खाद खरीदने के लिए अब जरूरी

सरकार ने स्पष्ट किया है कि अब रासायनिक खाद (फर्टिलाइजर) खरीदने के लिए एफआईडी अनिवार्य होगी। किसानों को अपनी जमीन को भी इस आईडी से लिंक करना होगा। इसके आधार पर ‘ई-किसान’ तकनीक के जरिए खाद का वितरण किया जाएगा।

खाद संकट की आशंका, सख्ती बढ़ी

वैश्विक परिस्थितियों और युद्ध के कारण खाद निर्माण में उपयोग होने वाले कच्चे माल के आयात में बाधा आई है। इससे इस वर्ष उत्पादन में कमी की आशंका जताई जा रही है।

इसी कारण सरकार ने खाद वितरण पर कड़ी निगरानी रखने का निर्णय लिया है और एफआईडी को अनिवार्य कर दिया है, ताकि सही किसानों तक ही खाद पहुंचे और किसी प्रकार की गड़बड़ी न हो।

 

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By Bharat Ki Awaz

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