वर्षावास लाभार्थियों का सम्मान
आचार्य विमलसागर सूरीश्वर का प्रेरक संदेश
गदग. स्थानीय राजस्थान जैन श्वेतांबर मूर्तिपूजक संघ के तत्वावधान में पाश्र्व बुद्धि वीर वाटिका में वर्षावास के लाभार्थियों का सम्मान समारोह आयोजित किया गया। इस अवसर पर जैनाचार्य विमलसागर सूरीश्वर ने कहा कि जीवन में सफलता और सम्मान प्राप्त करने के लिए विवेक अत्यंत आवश्यक है।
“विवेक ही जीवन की सच्ची दिशा”
आचार्य ने कहा कि विवेकवान व्यक्ति ही अपने कर्तव्यों का सही पालन कर जीवन को सफल बना सकता है। शास्त्रों में विवेकहीन व्यक्ति की उपलब्धियों का कोई महत्व नहीं बताया गया है। व्यवहार, धर्म और समाज हर क्षेत्र में विवेक दृष्टि का होना अनिवार्य है।
उन्होंने कहा कि विनय और विवेक एक-दूसरे के पूरक हैं। विनय से विवेक उत्पन्न होता है और विवेकी व्यक्ति सदैव विनम्र रहता है। विवेक मनुष्य की बौद्धिक शुद्धता, योग्यता और परिपक्वता का प्रतीक है।
विवेकहीनता के उदाहरणों से किया सचेत
आचार्य ने समाज में व्याप्त विवेकहीनता के कई उदाहरण देते हुए कहा कि मंदिर में अनुचित आचरण, बड़ों का अनादर, मर्यादा रहित वाणी, महिलाओं के प्रति दुव्र्यवहार, निंदा, दुर्जनों की संगति और धन का दुरुपयोग ये सभी विवेकहीनता के लक्षण हैं। बिना विवेक के न तो धर्म साधना संभव है और न ही सामाजिक जीवन सुचारू रूप से चल सकता है।
उन्होंने आधुनिक शिक्षा प्रणाली पर भी चिंता जताते हुए कहा कि आज की शिक्षा मनुष्य को विवेकवान बनाने के बजाय कई बार विवेकहीनता की ओर ले जा रही है।
पदयात्रा व सामूहिक चैत्यवंदना
इससे पूर्व आचार्य विमलसागर सूरीश्वर, गणि पद्मविमलसागर एवं अन्य श्रमणजनों ने पदयात्रा करते हुए पाश्र्वनाथ जिनालय पहुंचकर सामूहिक चैत्यवंदना की।
लाभार्थियों का हुआ सम्मान
समारोह में नरसिंगमल लुंकड़ परिवार द्वारा वर्षावास के लाभार्थियों का तिलक एवं स्मृतिचिन्ह देकर सम्मान किया गया। साथ ही ऐतिहासिक वर्षावास के संस्मरण भी साझा किए गए।
जैन संघ के निर्मल पारेख ने जानकारी दी कि शुक्रवार प्रात: 9 बजे धर्मसभा का आयोजन किया जाएगा, जिसमें श्रद्धालुओं से अधिकाधिक संख्या में उपस्थित रहने का आह्वान किया गया।
Breaking News सबसे पहले पाना चाहते हैं?
अभी हमारे WhatsApp Channel को join करें
हर खबर सबसे पहले
Join करें : https://whatsapp.com/channel/0029Vb7S2RA65yD9fZX4Og1Z

