केंद्र-राज्य खींचतान से योजना प्रभावित
38 करोड़ रुपए बकाया, हजारों श्रमिकों पर संकट
कोप्पल. मनरेगा योजना में बदलाव और केंद्र-राज्य सरकारों के बीच तालमेल की कमी का खामियाजा अब ग्रामीण मजदूरों को भुगतना पड़ रहा है। जिले में हालात ऐसे बन गए हैं कि न काम मिल रहा है और न ही समय पर मजदूरी, जिससे हजारों श्रमिकों के सामने रोजगार का संकट खड़ा हो गया है।
नई योजना पर विवाद, काम ठप
केंद्र सरकार द्वारा योजना के नाम और स्वरूप में बदलाव कर नए मॉडल के तहत लागू करने की तैयारी की गई है, जिसमें राज्यों की भी वित्तीय भागीदारी जरूरी है। इसी मुद्दे पर राज्य सरकार की अनिच्छा के कारण नई कार्ययोजना तैयार नहीं हो सकी, जिससे इस वर्ष काम शुरू ही नहीं हो पाया।
1 लाख से अधिक मजदूर प्रभावित
जिले में पिछले वित्तीय वर्ष में 60 लाख से अधिक मानव-दिवस सृजित किए गए थे, लेकिन इस बार 1,03,669 मजदूर बेरोजगार हो गए हैं। करीब 38 करोड़ रुपए की राशि अभी भी बकाया है, जबकि 7,688 कार्यों का भुगतान लंबित है।
पलायन को मजबूर ग्रामीण
काम के अभाव में कुष्टगी, कनकगिरी और अलवंडी क्षेत्रों के लोग अब दक्षिण कन्नड़, उडुपी, गोवा और बेंगलूरु जैसे शहरों की ओर पलायन कर रहे हैं। बढ़ती गर्मी और स्थानीय स्तर पर काम की कमी ने उनकी मुश्किलें और बढ़ा दी हैं।
मजदूरी भुगतान में देरी
अलवंडी की चंद्रकला दासर ने कहा कि कई श्रमिकों को 5-6 महीने पहले किए गए कार्यों की मजदूरी हाल ही में मिली है। पहले मनरेगा से घर के पास काम मिल जाता था, अब न काम है न समय पर पैसा।
कर्मचारियों पर भी संकट
इस योजना से जुड़े राज्यभर के लगभग 8 हजार कर्मचारियों की नौकरी पर भी अनिश्चितता के बादल मंडरा रहे हैं। विभिन्न स्तरों पर कार्यरत तकनीकी और प्रशासनिक कर्मचारियों को भविष्य की चिंता सता रही है।
जिला पंचायत उपसचिव टी. कृष्णमूर्ति ने बताया कि सरकार से अनुदान आना बाकी है और फिलहाल पुराने कार्यों को ही पूरा करने के निर्देश दिए गए हैं।
Breaking News सबसे पहले पाना चाहते हैं?
अभी हमारे WhatsApp Channel को join करें
हर खबर सबसे पहले
Join करें : https://whatsapp.com/channel/0029Vb7S2RA65yD9fZX4Og1Z

