दक्षिणी राज्यों के प्रतिनिधित्व घटने की आशंका; नई नीति बनाने की मांग
बेलगावी. प्रस्तावित 2026 के निर्वाचन क्षेत्र परिसीमन (डिलिमिटेशन) को लेकर संसद में गंभीर चिंता जताई गई है। चिक्कोड़ी की सांसद प्रियंका सतीश जारकीहोली ने कहा कि यह मसौदा देश की संघीय व्यवस्था और राज्यों के बीच राजनीतिक संतुलन को प्रभावित कर सकता है।
‘एक व्यक्ति, एक वोट’ पर पुनर्विचार की जरूरत
उन्होंने कहा कि ‘एक व्यक्ति, एक वोट’ का सिद्धांत संवैधानिक रूप से सही है, लेकिन केवल जनसंख्या के आधार पर सीटों का पुनर्वितरण करने से विकास में आगे रहे राज्यों के साथ अन्याय हो सकता है।
दक्षिणी राज्यों को नुकसान का खतरा
सांसद ने तर्क दिया कि दक्षिण भारत के राज्यों ने परिवार नियोजन, शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में बेहतर प्रदर्शन करते हुए जनसंख्या नियंत्रण में सफलता हासिल की है। ऐसे में यदि केवल जनसंख्या को आधार बनाया गया, तो इन राज्यों का संसद में प्रतिनिधित्व कम हो सकता है।
संघीय ढांचे पर असर की आशंका
उन्होंने चेतावनी दी कि अधिक जनसंख्या वाले राज्यों को ज्यादा सीटें मिलने से देश का संघीय संतुलन बिगड़ सकता है और नीतियों में क्षेत्रीय असंतुलन पैदा हो सकता है। इससे विकसित राज्यों के हितों की अनदेखी होने की आशंका है।
आर्थिक पहलू भी महत्वपूर्ण
प्रियंका जारकीहोली ने कहा कि जो राज्य अधिक कर योगदान देते हैं, उनकी राजनीतिक शक्ति कम होने से ‘प्रतिनिधित्व के बिना कराधान’ जैसी भावना पैदा हो सकती है, जिससे क्षेत्रीय असंतोष बढ़ सकता है।
सर्वसम्मति से निर्णय की मांग
उन्होंने सुझाव दिया कि इस मुद्दे पर नया फॉर्मूला तैयार करना चाहिए, राज्यसभा को और सशक्त बनाना चाहिए तथा सभी राज्यों की सहमति से ही ऐसा महत्वपूर्ण निर्णय लेना चाहिए।
महिला आरक्षण पर जोर
सांसद ने महिला आरक्षण विधेयक के शीघ्र क्रियान्वयन की भी मांग की। उन्होंने बसवन्ना के ‘अनुभव मंडप’ का उदाहरण देते हुए कहा कि प्राचीन काल से ही महिलाओं को अवसर दिए जाते रहे हैं।
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