पीएम के आरोपों पर सिद्धरामय्या का पलटवार
दक्षिण राज्यों के साथ ‘अन्याय’ की जताई आशंका
हावेरी. महिला आरक्षण विधेयक को लेकर जारी राजनीतिक बहस के बीच कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धरामय्या ने स्पष्ट किया कि कांग्रेस पार्टी महिला आरक्षण के खिलाफ नहीं है, बल्कि प्रस्तावित परिसीमन (डिलिमिटेशन) को लेकर उनकी आपत्ति है।
‘कांग्रेस महिला विरोधी नहीं’
राणेबेन्नूर में रविवार को मीडिया से बातचीत में सिद्धरामय्या ने कहा कि 2023 में संसद में महिला आरक्षण विधेयक पारित हो चुका है, जिससे कांग्रेस का रुख स्पष्ट है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा लगाए गए आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि कांग्रेस को महिला विरोधी बताना पूरी तरह गलत और राजनीतिक उद्देश्य से प्रेरित है।
परिसीमन से संतुलन बिगडऩे का डर
मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्तमान प्रस्ताव में क्षेत्र पुनर्विभाजन को जोडऩा चिंताजनक है। उनके अनुसार, इससे उत्तर भारत के राज्यों में सीटों की संख्या बढ़ेगी, जबकि दक्षिण भारत के राज्यों का प्रतिनिधित्व सीमित रह सकता है।
उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश में लोकसभा सीटें 80 से बढक़र 120 तक हो सकती हैं, जबकि कर्नाटक में संख्या लगभग 42 के आसपास ही रहेगी, जिससे राजनीतिक संतुलन प्रभावित होगा।
कांग्रेस का पुराना रुख याद दिलाया
सिद्धरामय्या ने कहा कि स्थानीय निकायों में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने का निर्णय कांग्रेस सरकार ने ही लिया था। उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी के समय हुए 73वें और 74वें संविधान संशोधनों का उल्लेख करते हुए कहा कि भाजपा ने उस समय इस मुद्दे पर पहल नहीं की थी।
संवैधानिक प्रक्रिया पर जोर
मुख्यमंत्री ने कहा कि इस तरह के विधेयक को लागू करने के लिए संसद में दो-तिहाई बहुमत और कम से कम 50 प्रतिशत राज्यों की सहमति आवश्यक होती है। उन्होंने सुझाव दिया कि यदि महिला आरक्षण को परिसीमन से अलग रखा जाता, तो इसका व्यापक समर्थन मिलता।
सिद्धरामय्या के इस बयान से महिला आरक्षण और परिसीमन को लेकर राजनीतिक बहस और तेज हो गई है।
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