रामायण पर टिप्पणी को लेकर माफी मांगे के.एस. भगवानवी.एस. उग्रप्पा।

पूर्व सांसद वी.एस. उग्रप्पा ने की मांग

महर्षि वाल्मीकि और रामायण पर आपत्तिजनक टिप्पणी से आहत हुईं भावनाएं

बागलकोट. पूर्व सांसद वी.एस. उग्रप्पा ने प्रो. के.एस. भगवान द्वारा वाल्मीकि रामायण को लेकर दिए गए विवादित बयान की आलोचना करते हुए उनसे सार्वजनिक रूप से माफी मांगने की मांग की है। उन्होंने कहा कि यह समझ नहीं आ रहा कि उनकी ऐसी टिप्पणियां उम्र के कारण हैं या किसी अन्य वजह से, लेकिन इस तरह की बातें करना उचित नहीं है।

पत्रकारों से बातचीत में उग्रप्पा ने कहा कि प्रो. भगवान ने महर्षि वाल्मीकि और रामायण के बारे में अनुचित टिप्पणी की है। महात्मा गांधी ने रामराज्य की कल्पना की थी और ऐसे में रामायण के प्रति अपमानजनक टिप्पणी करना उचित नहीं है। यदि किसी समुदाय को लेकर कोई असंतोष है, तो भी इस प्रकार की अभिव्यक्ति शोभा नहीं देती और इससे लोगों की भावनाएं आहत हुई हैं।

भोवी और वड्डर समुदाय अलग-अलग

एक अन्य मुद्दे पर पूर्व सांसद उग्रप्पा ने कहा कि भोवी और वड्डर समुदाय पूरी तरह अलग जातियां हैं और सरकार को इस तथ्य को स्वीकार करना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि अनुसूचित जाति प्रमाणपत्र जारी करने के दौरान अधिकारी भ्रम की स्थिति पैदा कर रहे हैं, जिससे भोवी समुदाय के लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

उग्रप्पा ने कहा कि अधिकारियों द्वारा दोनों समुदायों के बीच संबंधों के बारे में पूछकर प्रमाणपत्र जारी करने में अनावश्यक अड़चनें पैदा की जा रही हैं। इससे राज्य के छोटे और सामाजिक रूप से पिछड़े समुदायों के साथ अन्याय हो रहा है।

उन्होंने कहा कि वर्ष 1950 की अनुसूचित जाति सूची में भोवी समुदाय को पहले ही शामिल किया गया था, जबकि बाद में देवराज अरसु के कार्यकाल में वड्डर समाज को भी इसमें जोड़ा गया। इसलिए दोनों समुदायों को अलग-अलग मानते हुए प्रशासनिक स्तर पर स्पष्टता लानी चाहिए।

उग्रप्पा ने कहा कि महर्षि वाल्मीकि और रामायण के बारे में इस तरह की टिप्पणी उचित नहीं है। इससे लोगों की भावनाएं आहत हुई हैं और प्रो. के.एस. भगवान को इसके लिए माफी मांगनी चाहिए।

 

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By Bharat Ki Awaz

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