हुब्बल्ली में दक्षिण भारत का पहला ग्रीन चारकोल संयंत्र तैयारग्रीन चारकोल।

सूखे कचरे से बनेगा पर्यावरण अनुकूल ईंधन

प्रतिदिन 120 टन ग्रीन चारकोल उत्पादन का लक्ष्य

हुब्बल्ली. हुब्बल्ली-धारवाड़ की लंबे समय से चली आ रही ठोस कचरा निस्तारण की समस्या का अब आधुनिक तकनीक से समाधान होने जा रहा है। दक्षिण भारत का पहला अत्याधुनिक ग्रीन चारकोल संयंत्र हुब्बल्ली के गब्बूर क्षेत्र में बनकर तैयार हो गया है और जल्द ही इसका औपचारिक संचालन शुरू होगा।

सूखे कचरे से बनेगा हरित ईंधन

करीब 10 एकड़ क्षेत्र में स्थापित इस संयंत्र को राष्ट्रीय ताप विद्युत निगम (एनटीपीसी) की सहयोगी विद्युत व्यापार निगम ने विकसित किया है। केंद्रीय मंत्री प्रल्हाद जोशी ने हाल ही में संयंत्र का निरीक्षण कर इसकी प्रगति की समीक्षा की। इस परियोजना को उनकी विशेष पहल और प्रयासों का परिणाम माना जा रहा है।

वर्तमान में हुब्बल्ली में प्रतिदिन लगभग 280 टन और धारवाड़ में 120 टन यानी कुल 400 टन ठोस कचरा उत्पन्न होता है। इसमें से गीले और सूखे कचरे को अलग करने के बाद केवल सूखे कचरे को इस संयंत्र में भेजा जाएगा।

रोजाना 120 टन ग्रीन चारकोल का उत्पादन

यह संयंत्र प्रतिदिन अधिकतम 200 टन सूखे कचरे का वैज्ञानिक प्रसंस्करण कर लगभग 120 टन पर्यावरण अनुकूल ग्रीन चारकोल तैयार करने में सक्षम होगा। संयंत्र के सुचारु संचालन के लिए हुब्बल्ली-धारवाड़ महानगर निगम ने प्रतिदिन 150 टन सूखा कचरा उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया है।

इस परियोजना से तैयार होने वाला ग्रीन चारकोल ताप विद्युत संयंत्रों में कोयले के विकल्प के रूप में उपयोग किया जा सकेगा। इससे न केवल कचरे के निस्तारण की समस्या का समाधान होगा, बल्कि पर्यावरण प्रदूषण में भी उल्लेखनीय कमी आएगी। विशेषज्ञों का मानना है कि कचरे से ऊर्जा उत्पादन की यह पहल स्वच्छ शहरों के निर्माण की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि साबित होगी और दक्षिण भारत के लिए एक अनुकरणीय मॉडल बनेगी।

 

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By Bharat Ki Awaz

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