पुष्य-आश्लेषा बारिश से जलभराव की आस
बांध में जलस्तर 23 फीट कम, फिर भी धान की नर्सरी तैयार करने में जुटे किसान
जुलाई के दूसरे सप्ताह से अच्छी बारिश की उम्मीद
दावणगेरे. मानसून की धीमी शुरुआत के कारण जिले की जीवनरेखा माने जाने वाले भद्रा बांध में जून समाप्त होने तक जलस्तर में एक फुट की भी बढ़ोतरी नहीं हुई है। इसके बावजूद सिंचित क्षेत्र के किसानों ने उम्मीद नहीं छोड़ी है। उनका विश्वास है कि 2 जुलाई से शुरू होने वाली पुष्य वर्षा और अगस्त की आश्लेषा वर्षा बांध में पर्याप्त पानी लाएगी, जिससे धान की खेती प्रभावित नहीं होगी।
जलस्तर में भारी गिरावट, फिर भी खेती की तैयारी जारी
भद्रा सिंचाई परियोजना पर निर्भर गांवों में इन दिनों सबसे अधिक चर्चा बांध के जलस्तर को लेकर हो रही है। धान की नर्सरी तैयार करने का समय शुरू हो चुका है। जिन किसानों के पास बोरवेल की सुविधा है, वे उसी के सहारे नर्सरी तैयार कर रहे हैं और नहरों में पानी आने का इंतजार कर रहे हैं।
पिछले वर्ष इसी दिन बांध का जलस्तर 159.6 फीट था तथा 26,646 क्यूसेक पानी की आवक हो रही थी। इस वर्ष जलस्तर घटकर 136.8 फीट रह गया है। बांध में केवल 211 क्यूसेक पानी की आवक और लगभग इतनी ही निकासी हो रही है। यानी पिछले वर्ष की तुलना में जलस्तर करीब 23 फीट कम है।
जुलाई में बढ़ती है पानी की आवक
किसानों का कहना है कि भद्रा बांध में सामान्यत: जुलाई के दूसरे सप्ताह से पानी की आवक तेज होती है। मललकेरे के किसान प्रकाश और रामगोंडनहल्ली के किसान महेंद्र ने बताया कि पहले भी कई बार शुरुआती बारिश कमजोर रही, लेकिन जुलाई के अंत और अगस्त में बांध भरने के बाद नहरों में पानी छोड़ा गया और धान की रोपाई सफलतापूर्वक हुई।
किसान नेता बी.एम. सतीश ने कहा कि गांवों में रोजाना बांध के पानी को लेकर चर्चा हो रही है, लेकिन किसानों का भरोसा कायम है।
भारतीय किसान संघ के अध्यक्ष शामनूर लिंगराज ने कहा कि पिछले वर्ष बांध का जल्दी भरना अपवाद था, जबकि सामान्य परिस्थितियों में जुलाई के दूसरे सप्ताह से ही पर्याप्त जलप्रवाह शुरू होता है।
जुलाई में केवल चार बार ही भरा बांध
भद्रा बांध के इतिहास में जुलाई महीने में पूर्ण क्षमता तक जलभराव केवल चार बार हुआ है—31 जुलाई 1967, 27 जुलाई 2013, 30 जुलाई 2024 और 12 जुलाई 2025। अधिकांश बारिश में बांध अगस्त, सितंबर अथवा नवंबर में भरता रहा है। ऐसे में किसान इस बार भी अच्छी बारिश के साथ बांध भरने की उम्मीद लगाए हुए हैं।
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