जलाशय में क्षमता का केवल 10 प्रतिशत पानी शेष
पेयजल आपूर्ति को दी जा रही प्राथमिकता
दांडेली (उत्तर कन्नड़). काली जलविद्युत परियोजना की प्रमुख कड़ी माने जाने वाले सुपा जलाशय में इस वर्ष गंभीर जल संकट उत्पन्न हो गया है। अपेक्षित मानसूनी बारिश नहीं होने के कारण जलाशय में कुल भंडारण क्षमता का मात्र 10 प्रतिशत पानी शेष है, जबकि 90 प्रतिशत क्षमता अब भी खाली पड़ी है। इससे राज्य में जलविद्युत उत्पादन पर संकट के बादल मंडराने लगे हैं।
बिजली उत्पादन पर पड़ सकता है सीधा असर
वर्तमान में जलाशय में आने वाले पानी की तुलना में निकासी अधिक होने से स्थिति और चिंताजनक हो गई है। जल उपलब्धता घटने के कारण बिजली उत्पादन की अपेक्षा पेयजल आपूर्ति को प्राथमिकता देने की नौबत आ गई है।
सुपा जलाशय से छोड़े जाने वाले पानी पर नीचे स्थित बोम्मनहल्ली, कोडसल्ली और कद्रा जलविद्युत परियोजनाएं निर्भर हैं। ऐसे में सुपा का जलस्तर लगातार गिरने से इन तीनों परियोजनाओं में बिजली उत्पादन प्रभावित होने की आशंका बढ़ गई है। राज्य में बढ़ती बिजली मांग के बीच जलविद्युत उत्पादन में कमी ऊर्जा प्रबंधन के लिए बड़ी चुनौती बन सकती है।
अच्छी बारिश ही संकट से दिला सकती है राहत
पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में इस बार जलाशय में पानी का भंडारण काफी कम है। इसका प्रमुख कारण जलग्रहण क्षेत्र में सामान्य से कम बारिश होना बताया जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में अच्छी बारिश होने और जलग्रहण क्षेत्रों से पर्याप्त जलप्रवाह मिलने पर ही जलाशय का जलस्तर सुधर सकेगा तथा बिजली उत्पादन सामान्य स्थिति में लौट पाएगा।
सुपा जलाशय केवल जलविद्युत उत्पादन का ही नहीं, बल्कि सिंचाई, तालाबों की भराई और विभिन्न पेयजल योजनाओं का भी प्रमुख स्रोत है। ऐसे में यदि बारिश की कमी जारी रहती है तो बिजली उत्पादन के साथ-साथ सिंचाई और पेयजल आपूर्ति भी व्यापक रूप से प्रभावित हो सकती है।
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