मानसून की बेरुखी से गहराया जल संकट
लाखों हेक्टेयर खेती और पशुपालन पर बढ़ा खतरा
अधिकांश जिलों में तालाबों का जलस्तर चिंताजनक
यादगीर। पर्याप्त वर्षा नहीं होने से कर्नाटक में जल संकट गहराता जा रहा है। राज्य के 5,862 तालाब अब भी पूरी तरह नहीं भर पाए हैं, जिससे आगामी दिनों में पेयजल और सिंचाई संकट गहराने की आशंका बढ़ गई है। सूखे पड़े तालाबों की फटी तलहटी प्रदेश में वर्षा की कमी की गंभीर स्थिति बयां कर रही है।
राज्य के लघु सिंचाई विभाग के अधीन 3,817 तालाबों में से 616 पूरी तरह सूखे पड़े हैं। वहीं, जिला पंचायत के अधीन 32,504 तालाबों में से 5,246 तालाब खाली हैं। लघु सिंचाई विभाग के केवल 22 तालाब ही पूरी तरह भर सके हैं, जबकि जिला पंचायत क्षेत्र के 562 तालाब ही लबालब हैं।
कई तालाबों में आधा भी नहीं भर पाया पानी
लघु सिंचाई विभाग के अनुसार, 1,802 तालाबों में 1 से 30 प्रतिशत, 791 तालाबों में 31 से 50 प्रतिशत तथा 582 तालाबों में 51 से 99 प्रतिशत तक ही पानी है। इसी प्रकार जिला पंचायत के 11,825 तालाबों में 1 से 30 प्रतिशत, 10,379 तालाबों में 31 से 50 प्रतिशत तथा 4,377 तालाबों में 51 से 99 प्रतिशत तक जलभराव दर्ज किया गया है।
सबसे अधिक सूखे तालाब तुमकूरु (215) में हैं। इसके बाद बेलगावी (79), बीदर (57), विजयपुर (56), शिवमोग्गा (51), कलबुर्गी (30), चित्रदुर्ग (24), दावणगेरे (22), कोलार (13) और बागलकोट (12) का स्थान है। यादगीर में दो तथा बेंगलूरु शहर और बल्लारी में एक-एक तालाब पूरी तरह सूख चुका है।

किसानों और पशुपालकों की बढ़ी चिंता
कर्नाटक प्रांत किसान संघ के प्रदेश उपाध्यक्ष चन्नप्पा आनेगुंदी ने कहा कि तालाब लाखों हेक्टेयर कृषि भूमि की सिंचाई और पशुओं के लिए पेयजल का प्रमुख स्रोत हैं। इनके सूख जाने से किसानों के साथ-साथ पशुपालकों की भी मुश्किलें बढ़ गई हैं। उनका कहना है कि यदि नदियों, जलाशयों और ब्रिज-कम-बैराज से तालाबों को भरने की योजनाओं का प्रभावी ढंग से क्रियान्वयन किया गया होता, तो सूखे के दौरान जल संकट की स्थिति काफी हद तक टाली जा सकती थी।
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