फसल बीमा पंजीकरण में बैंकों की उदासीनता, किसान असमंजस में

सरकारी निर्देश के बावजूद ऋण लेने वाले किसानों का बीमा नहीं हो रहा, केवल 10 प्रतिशत पंजीकरण

दावणगेरे. राज्य सरकार के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद फसल ऋण लेने वाले किसानों का अनिवार्य फसल बीमा पंजीकरण बैंकों में नहीं हो पा रहा है। इससे किसान असमंजस की स्थिति में हैं, जबकि संभावित सूखे के बीच फसल सुरक्षा को लेकर उनकी चिंता बढ़ गई है।

बैंक करा रहे ऑप्ट आउट पर हस्ताक्षर

सरकारी दिशा-निर्देशों के अनुसार किसानों को फसल ऋण लेते समय ही प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना और पुनर्गठित मौसम आधारित फसल बीमा योजना के तहत पंजीकरण कराया जाना चाहिए। लेकिन किसानों का आरोप है कि बैंक बीमा कराने के बजाय उनसे बीमा नहीं कराना है (ऑप्ट आउट) संबंधी आवेदन पर हस्ताक्षर करवा रहे हैं। परिणामस्वरूप चालू सीजन में अब तक केवल लगभग 10 प्रतिशत किसानों का ही बीमा पंजीकरण हो सका है।

सीएससी केंद्रों पर भी दुविधा

जिन किसानों ने फसल ऋण नहीं लिया है, केवल उन्हें ही सीएससी और ग्राम वन केंद्रों के माध्यम से बीमा कराने की अनुमति है। यदि ऑडिट के दौरान किसान के ऋण लेने की जानकारी सामने आती है तो उसका आवेदन निरस्त किया जा सकता है। इससे किसान असमंजस में हैं और कई स्थानों पर पंजीकरण प्रक्रिया भी प्रभावित हुई है।

बिचौलियों को मिल रहा मौका

किसानों का कहना है कि बैंकों की उदासीनता का लाभ बिचौलिए उठा रहे हैं। पहले भी प्रीमियम भरने का लालच देकर किसानों के दस्तावेज लेकर फर्जी बीमा पंजीकरण और मुआवजे में अनियमितताओं के मामले सामने आ चुके हैं। ऐसे मामलों में बागलकोट और गदग जिलों में कार्रवाई भी की गई थी।

कुछ बैंक प्रबंधकों का कहना है कि उन्हें इस संबंध में अब तक कोई स्पष्ट सरकारी दिशा-निर्देश प्राप्त नहीं हुए हैं। किसानों ने सरकार से तत्काल हस्तक्षेप कर सभी बैंकों में फसल बीमा पंजीकरण सुनिश्चित कराने तथा भ्रम की स्थिति दूर करने की मांग की है।

 

Breaking News सबसे पहले पाना चाहते हैं?

अभी हमारे WhatsApp Channel को join करें

हर खबर सबसे पहले

Join करें : https://whatsapp.com/channel/0029Vb7S2RA65yD9fZX4Og1Z

Spread the love

By Bharat Ki Awaz

मैं भारत की आवाज़ हिंदी न्यूज़ पोर्टल से जुड़ा हुआ हूँ, जहाँ मेरा उद्देश्य पाठकों तक सटीक, निष्पक्ष और ताज़ा ख़बरें पहुँचाना है। राजनीति, समाज, संस्कृति और स्थानीय मुद्दों पर गहरी रुचि रखते हुए मैं हमेशा कोशिश करता हूँ कि समाचार केवल सूचना न हों, बल्कि पाठकों को सोचने और समझने का अवसर भी दें। मेरी लेखनी का मक़सद है—जनता की आवाज़ को मंच देना और देश-समाज से जुड़े हर पहलू को ईमानदारी से प्रस्तुत करना। भारत की आवाज़ के माध्यम से मैं चाहता हूँ कि पाठक न केवल ख़बरें पढ़ें, बल्कि उनसे जुड़ाव महसूस करें।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *