बागलकोट और हावेरी क्षेत्र में बोई गई फसलें मुरझाईं, पुनर्बुवाई की आशंका
जल संकट से पशुपालन भी प्रभावित
बादामी/जमखंडी/हट्टी. कर्नाटक के कई हिस्सों में कमजोर मानसून ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। बादामी, जमखंडी तथा हट्टी स्वर्ण खदान क्षेत्र के आसपास पर्याप्त बारिश नहीं होने से खरीफ की बोई गई फसलें सूखने लगी हैं। किसान दोबारा बुवाई की आशंका और आर्थिक नुकसान के डर से आसमान की ओर टकटकी लगाए बैठे हैं।
बादामी तालुक में जून के पहले सप्ताह में बोई गई मूंग, बाजरा, मक्का, अरहर, लोबिया, मूंगफली और सूरजमुखी की फसलें तेज धूप और नमी की कमी से मुरझाने लगी हैं। कृषि विभाग के अनुसार, कुल 55,102 हेक्टेयर लक्ष्य के मुकाबले अब तक 37,651 हेक्टेयर (67.47 प्रतिशत) क्षेत्र में ही बुवाई हो सकी है। कई स्थानों पर अभी भी पर्याप्त बारिश का इंतजार है।
पुनर्बुवाई की आशंका
जमखंडी क्षेत्र में लगभग 77 प्रतिशत किसानों ने बारिश के भरोसे बुवाई की थी, लेकिन लंबे अंतराल से बारिश नहीं होने के कारण कई स्थानों पर बीज अंकुरित ही नहीं हुए, जबकि जहां अंकुरण हुआ है वहां पौधे सूखने लगे हैं। कृषि विभाग के अधिकारियों के अनुसार जून महीने में सामान्य से लगभग 91 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई है, जिससे किसानों के सामने पुनर्बुवाई की स्थिति बन सकती है।
पशुधन और पेयजल पर भी संकट
बारिश की कमी का असर केवल खेती तक सीमित नहीं है। चारे और पेयजल का संकट भी गहराने लगा है। कृष्णा नदी में जलस्तर घटने से नदी किनारे के गांवों में पानी की समस्या बढ़ गई है। कई स्थानों पर टैंकरों के माध्यम से पानी की व्यवस्था करनी पड़ रही है, जबकि पशुओं के लिए चारे की कमी से दुग्ध उत्पादन भी प्रभावित हो रहा है।
रायचूर हट्टी स्वर्ण खदान क्षेत्र के अंतर्गत कई गांवों में किसान अरहर, कपास और सूरजमुखी की फसलों को बचाने के लिए बोरवेल और स्प्रिंकलर का सहारा ले रहे हैं। किसानों ने सरकार से फसल नुकसान का सर्वे कराकर शीघ्र राहत देने तथा पुनर्बुवाई की स्थिति बनने पर विशेष सहायता उपलब्ध कराने की मांग की है।
Breaking News सबसे पहले पाना चाहते हैं?
अभी हमारे WhatsApp Channel को join करें
हर खबर सबसे पहले
Join करें : https://whatsapp.com/channel/0029Vb7S2RA65yD9fZX4Og1Z

