हुब्बल्ली। लाखों लोगों के सपनों और लाखों टन माल को अपने भीतर समेटकर देशभर में पहुंचाने वाली भारतीय रेलवे देश की वास्तविक जीवनरेखा है। दुनिया के चौथे सबसे बड़े रेल नेटवर्क के रूप में पहचाने जाने वाली भारतीय रेलवे प्रतिदिन सैकड़ों करोड़ रुपए का राजस्व अर्जित करती है, लेकिन इसके सामने आंतरिक चुनौतियां भी कम नहीं हैं।
13 हजार से अधिक ट्रेनें, 8,800 से ज्यादा स्टेशन
भारतीय रेलवे का नेटवर्क करीब 1,26,366 किलोमीटर लंबा है, जिसमें रनिंग ट्रैक की लंबाई 99,235 किलोमीटर है।
देशभर में प्रतिदिन करीब 13,500 यात्री ट्रेनें और 11,000 से अधिक मालगाडिय़ां, यानी कुल 24,000 से अधिक ट्रेनें पटरियों पर दौड़ती हैं। देश के 8,800 से अधिक रेलवे स्टेशनों से रोजाना औसतन 2 से 2.5 करोड़ यात्री आवागमन करते हैं।
रोजाना 600 करोड़ रुपए की कमाई, सबसे बड़ा हिस्सा माल ढुलाई से
रेलवे प्रतिदिन औसतन करीब 600 करोड़ रुपए का राजस्व अर्जित करता है। वर्ष 2021-22 में यह करीब 400 करोड़ रुपए प्रतिदिन था। रेलवे ने अगले वित्त वर्ष में कुल राजस्व को 3 लाख करोड़ रुपए तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा है।
राजस्व के स्रोतों पर नजर डालें तो रेलवे की कमाई में सबसे बड़ा योगदान माल ढुलाई का है।
माल ढुलाई: कुल राजस्व का 75.02 प्रतिशत हिस्सा कोयला, सीमेंट, अनाज आदि की ढुलाई से आता है।
यात्री टिकट: कुल राजस्व में टिकट से होने वाली आय की हिस्सेदारी केवल 20.02 प्रतिशत है।
अन्य स्रोत: विज्ञापन और अन्य सेवाओं से करीब 4.6 प्रतिशत राजस्व मिलता है।
एसी-3 टियर और वंदे भारत जैसी प्रीमियम ट्रेनों की मांग बढ़ रही है। अकेले एसी-3 श्रेणी से 37,115 करोड़ रुपए से अधिक राजस्व मिलने का अनुमान है।
100 रुपए कमाने में 98.43 रुपए खर्च
भारी राजस्व के बावजूद भारतीय रेलवे को पूरी तरह लाभ कमाने वाली संस्था नहीं कहा जा सकता। इसका प्रमुख कारण इसका ऑपरेटिंग रेशियो 98.43 प्रतिशत होना है। यानी रेलवे को 100 रुपए की आय अर्जित करने के लिए ईंधन, कर्मचारियों के वेतन, बिजली और रखरखाव पर 98.43 रुपए खर्च करना पड़ता है।
इसके अलावा रेलवे केवल मुनाफे के लिए काम नहीं करता, बल्कि सामाजिक दायित्व भी निभाता है। रेलवे एक यात्री को एक किलोमीटर तक पहुंचाने पर करीब 1.38 रुपए खर्च करता है, जबकि किराए के रूप में उससे औसतन केवल 73 पैसे प्राप्त करता है।
यात्रियों को दी जाने वाली इस भारी सब्सिडी के कारण सामान्य यात्री सेवाओं से रेलवे को सालाना करीब 60,000 करोड़ रुपए का नुकसान होता है। इस नुकसान की भरपाई मालगाडिय़ों से होने वाली आय के जरिए की जाती है। इसे क्रॉस-सब्सिडी व्यवस्था कहा जाता है, जिसके माध्यम से रेलवे आम नागरिकों को अपेक्षाकृत कम किराए पर यात्रा की सुविधा उपलब्ध कराता है।
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