राज्य मंत्रिमंडल का कलबुर्गी समेत तीन हवाई अड्डों को योजना में शामिल करने की सिफारिश का फैसला
कलबुर्गी। क्षेत्रीय हवाई संपर्क को मजबूत करने के लिए केंद्र सरकार की ‘परिष्कृत उड़ान’ योजना में कलबुर्गी हवाई अड्डे को शामिल किए जाने की उम्मीद बढ़ गई है। राज्य मंत्रिमंडल ने 4 सितंबर को हुई बैठक में कलबुर्गी, शिवमोग्गा समेत कर्नाटक के तीन हवाई अड्डों को योजना में शामिल करने की केंद्र से सिफारिश करने का निर्णय लिया है।
केंद्र सरकार ने 25 मार्च 2026 को परिष्कृत उड़ान योजना को मंजूरी दी थी। करीब 28,840 करोड़ रुपए की इस योजना के तहत अगले 10 वर्षों में क्षेत्रीय और अपेक्षाकृत कम हवाई संपर्क वाले क्षेत्रों तक विमान सेवाओं का विस्तार करने का लक्ष्य है। कलबुर्गी में पहले से विमान सेवा उपलब्ध होने के बावजूद नई उड़ानें और अतिरिक्त सेवाएं शुरू कराने में इस योजना से मदद मिलने की उम्मीद है।
नई उड़ानों के साथ कारोबार को भी मिलेगी रफ्तार
‘उड़े देश का आम नागरिक’ की अवधारणा पर आधारित उड़ान योजना के तहत विमानन कंपनियों को नए क्षेत्रीय मार्गों पर सेवाएं शुरू करने के लिए वित्तीय सहायता मिल सकती है। इससे कलबुर्गी से देश के विभिन्न छोटे-बड़े शहरों के लिए नए हवाई मार्ग शुरू होने की संभावना है। बेहतर हवाई संपर्क से व्यापार, उद्योग, पर्यटन और आम लोगों की आवाजाही को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
सिर्फ सिफारिश नहीं, परिणाम चाहिए
राज्य सरकार के निर्णय के बाद अब स्थानीय जनप्रतिनिधियों पर केंद्र के समक्ष प्रभावी ढंग से पैरवी करने की जिम्मेदारी बढ़ गई है। क्षेत्र के सांसदों, राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे तथा अन्य जनप्रतिनिधियों की सक्रिय भूमिका महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि कलबुर्गी को योजना में शामिल करने की सिफारिश महज सरकारी प्रक्रिया बनकर न रह जाए। रेलवे डिवीजन (रेल मंडल) की घोषणा के बावजूद वर्षों से मामला लंबित रहने का उदाहरण सामने है। ऐसे में इस बार सिफारिश से आगे बढक़र मंजूरी और सेवाओं का विस्तार सुनिश्चित करने की मांग उठ रही है।
सुबह की बेंगलूरु उड़ान समेत नए रूट की मांग
केकेसीसीआई अध्यक्ष शरणबसप्पा पप्पा ने कहा कि कल्याण कर्नाटक के आर्थिक विकास के लिए कलबुर्गी हवाई अड्डे को परिष्कृत उड़ान योजना में शामिल करना जरूरी है। उन्होंने जनप्रतिनिधियों से केंद्र सरकार पर दबाव बनाने की मांग करते हुए कलबुर्गी-बेंगलूरु सुबह की उड़ान शुरू करने के साथ तिरुपति, सूरत और दिल्ली के लिए भी सीधी विमान सेवाएं शुरू करने की मांग की।
परिष्कृत उड़ान योजना से क्या मिलेगा?
कम यात्री आय वाले नए मार्गों के वित्तीय अंतर को केंद्र से सहायता।
निर्धारित संख्या में सीटें कम किराए पर उपलब्ध कराने की व्यवस्था।
हवाई अड्डा शुल्क में रियायत।
घरेलू और अंतरराष्ट्रीय विमानन कंपनियों के बीच कोड-शेयरिंग की सुविधा।
क्षेत्रीय हवाई संपर्क के विस्तार से व्यापार, पर्यटन और रोजगार को बढ़ावा।

