गणेशोत्सव में डीजे शोर पर सख्तीगणेशोत्सव में डीजे शोर पर सख्ती

हुब्बल्ली-धारवाड़ पुलिस आयुक्त का जागरूकता संदेश

हुब्बल्ली। गणेशोत्सव, जुलूस, रैलियां सहित विवाह, धार्मिक कार्यक्रमों में डीजे साउंड का अत्यधिक उपयोग बढ़ते जाने पर हुब्बल्ली-धारवाड़ पुलिस आयुक्त भूषण जी. बोरसे ने स्वास्थ्य और सार्वजनिक सुरक्षा को लेकर विशेष चेतावनी दी है।

डीजे शोर से बढ़ते खतरे

आयुक्त ने कहा कि उत्सव के नाम पर अत्यधिक ध्वनि न केवल दूसरों को असुविधा देती है, बल्कि स्वास्थ्य पर भी गंभीर असर डाल सकती है। हाल ही में हैदराबाद में गणेश जुलूस के दौरान 19 वर्षीय छात्र की मृत्यु की घटना ने इस मुद्दे को और गंभीर बना दिया है।

देशभर की घटनाओं का उल्लेख

आयुक्त ने बरेली, अलीगंज, भुवनेश्वर, सुल्तानपुर, सांगली, मध्यप्रदेश, आंध्रप्रदेश आदि स्थानों पर डीजे शोर से जुड़ी घटनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि ७० डेसिबल से अधिक ध्वनि हृदयाघात, मस्तिष्क में रक्तस्राव और पैनिक अटैक का कारण बन सकती है।

स्वास्थ्य पर प्रभाव

विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार अत्यधिक और लंबे समय तक शोर से नींद में बाधा, तनाव, श्रवणदोष और हृदय संबंधी बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। बच्चों, बुजुर्गों और हृदय रोगियों को इससे विशेष सावधानी बरतनी चाहिए।

नियम और नियंत्रण

ध्वनि प्रदूषण (विनियमन और नियंत्रण) नियम, 2000 के अनुसार लाउडस्पीकर या सार्वजनिक ध्वनि प्रणाली के लिए अनुमति आवश्यक है। रात 10 बजे से सुबह 6 बजे तक इसका उपयोग सामान्यत: प्रतिबंधित है। आवासीय क्षेत्रों में दिन में 55 और रात में 45 डेसिबल की सीमा तय की गई है।

आयुक्त बोरसे ने कहा कि “संभ्रम रहे, शोर का अतिरेक न हो।” उन्होंने आयोजकों और नागरिकों से अपील की कि उत्सव का आनंद दूसरों की शांति और स्वास्थ्य को प्रभावित किए बिना मनाया जाए। नियम उल्लंघन की स्थिति में नागरिक पुलिस हेल्पलाइन 112 पर शिकायत कर सकते हैं।

 

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By Bharat Ki Awaz

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