सरकार ने सीमा 3 लाख से बढ़ाकर 5 लाख की, कई सहकारी बैंकों में अब भी 3 लाख तक ही ऋण
कार्कल (उडुपी)। राज्य सरकार द्वारा किसानों को दिए जाने वाले ब्याजमुक्त अल्पकालीन कृषि ऋण की अधिकतम सीमा 3 लाख से बढ़ाकर 5 लाख रुपए किए जाने के बावजूद इसके क्रियान्वयन को लेकर किसानों और सहकारी संस्थाओं में असमंजस बना हुआ है। किसानों ने सरकार से योजना के संबंध में स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी करने की मांग की है।
आदेश के बावजूद नहीं मिल रहा 5 लाख तक ऋण
राज्य में प्राथमिक कृषि साख सहकारी समितियों (पीएसीएस) और जिला केंद्रीय सहकारी बैंकों के माध्यम से पात्र किसानों को वर्षों से शून्य ब्याज दर पर अल्पकालीन कृषि ऋण दिया जा रहा है। सरकार ने वर्ष 2023 में ही ऋण सीमा 3 लाख से बढ़ाकर 5 लाख रुपए करने का आदेश जारी किया था।
हालांकि, कई सहकारी समितियों में अब भी किसानों को केवल 3 लाख रुपए तक ही ब्याजमुक्त ऋण उपलब्ध कराया जा रहा है। दूसरी ओर, किसानों तक सरकार के नाम से मोबाइल और वाट्सऐप के माध्यम से 5 लाख रुपए तक ब्याजमुक्त कृषि ऋण उपलब्ध होने के संदेश पहुंच रहे हैं। इससे किसान सहकारी समितियों में पहुंचकर 5 लाख रुपए के ऋण की मांग कर रहे हैं, जबकि समितियां वास्तविक क्रियान्वयन को लेकर असमंजस में हैं।
बढ़ती कृषि लागत के बीच 5 लाख की मांग
किसानों का कहना है कि बीज, खाद, मजदूरी, कृषि मशीनरी, सिंचाई और फसल संरक्षण की लागत लगातार बढ़ रही है। ऐसे में 3 लाख रुपए की ऋण सीमा कई किसानों के लिए पर्याप्त नहीं है। इसलिए 5 लाख रुपए तक के ब्याजमुक्त ऋण की घोषणा का वास्तविक लाभ किसानों तक पहुंचना चाहिए।
असमंजस दूर करना चाहिए
सहकारी क्षेत्र कृषि अर्थव्यवस्था का प्रमुख आधार है। किसान सहकारी समितियों, जिला सहकारी बैंक, राज्य सहकारी बैंक और सरकार के बीच समन्वय से ही योजना प्रभावी ढंग से लागू हो सकती है। सरकार को तत्काल स्पष्ट आदेश जारी कर किसानों और सहकारी संस्थाओं का असमंजस दूर करना चाहिए।
–साणूर नरसिंह कामत, महासचिव, कर्नाटक राज्य सहकार भारती
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