पूर्व मंत्री ने सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश की निगरानी में जांच की मांग की
चंदा, निर्माण और ट्रस्ट की कार्यप्रणाली पर उठाए सवाल
उडुपी. पूर्व मंत्री विनय कुमार सोरके ने अयोध्या स्थित राम मंदिर से जुड़े कथित वित्तीय और प्रशासनिक मामलों की सुप्रीम कोर्ट के वर्तमान या सेवानिवृत्त न्यायाधीश की निगरानी में निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। उन्होंने कहा कि मंदिर निर्माण, दान राशि और अन्य आरोपों से जुड़े सभी तथ्यों को देश के सामने पारदर्शी ढंग से रखना चाहिए।
चंदे और निर्माण पर उठाए सवाल
उडुपी में बुधवार को आयोजित संवाददाता सम्मेलन में सोरके ने आरोप लगाया कि राम मंदिर निर्माण के लिए वर्षों तक देशभर से धन एकत्र किया गया, लेकिन उसकी पूरी लेखा-जोखा सार्वजनिक नहीं किया गया। उन्होंने कहा कि मंदिर निर्माण के दौरान कथित अनियमितताओं और रियल एस्टेट लेनदेन के आरोपों पर संबंधित ट्रस्ट को स्पष्ट जवाब देना चाहिए।
उन्होंने दावा किया कि कर्नाटक से जुड़े एक ट्रस्टी के रिश्तेदार को निर्माण कार्य में अवसर दिए जाने के आरोप सामने आए हैं, जिनकी निष्पक्ष जांच आवश्यक है।
आरटीआई और पारदर्शिता का मुद्दा
सोरके ने आरोप लगाया कि श्रद्धालुओं द्वारा दान किए गए सोने के उपयोग, मंदिर को सूचना का अधिकार (आरटीआइ) के दायरे से बाहर रखने तथा सीसीटीवी कैमरों को हटाए जाने जैसी खबरों ने भी कई सवाल खड़े किए हैं। उनके अनुसार, मंदिर परिसर के कुछ हिस्सों में क्षति संबंधी रिपोर्टों की भी स्वतंत्र जांच होनी चाहिए।
एसआइटी नहीं, न्यायिक जांच की मांग
पूर्व मंत्री ने कहा कि इन आरोपों की सच्चाई विशेष जांच दल (एसआइटी) से सामने आना कठिन है। इसलिए सुप्रीम कोर्ट के वर्तमान या सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता में जांच करानी चाहिए और यदि कोई दोषी पाया जाता है तो उसके विरुद्ध कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए।
सोरके ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भी इस मुद्दे पर प्रतिक्रिया देने की मांग करते हुए कहा कि जनता के मन में उठ रहे सवालों का पारदर्शी उत्तर मिलना चाहिए।
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