महंगे रेनकोट छोड़ सस्ते विकल्प की ओर बढ़ा रुझान
किसान से लेकर बाइक सवार तक की पहली पसंद बना बजट फ्रेंडली रेनकोट
पुत्तूर (दक्षिण कन्नड़). तटीय कर्नाटक में लगातार हो रही भारी बारिश के बीच महंगे रेनकोट की जगह 100 रुपए वाला हल्का और सस्ता रेनकोट लोगों की पहली पसंद बनता जा रहा है। किसान, खेतिहर मजदूर, दिहाड़ी श्रमिक, स्कूली बच्चों के अभिभावक और दोपहिया वाहन चालक बड़ी संख्या में इसी बजट फ्रेंडली रेनकोट का उपयोग कर रहे हैं।
बाजार में अच्छे ब्रांड के रेनकोट की कीमत एक हजार से दो हजार रुपए तक पहुंच जाती है, लेकिन उनकी टिकाऊ गुणवत्ता की कोई निश्चित गारंटी नहीं होती। ऐसे में पिछले दो-तीन वर्षों से कम कीमत वाला प्लास्टिक रेनकोट तेजी से लोकप्रिय हुआ है। इसकी कीमत मात्र 100 रुपए होने के कारण ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में इसकी मांग लगातार बढ़ रही है।
हल्का, सुविधाजनक और हर काम के लिए उपयोगी
पतले प्लास्टिक से बना यह रेनकोट बेहद हल्का होता है। इसे आसानी से मोडकऱ छोटे से बैग या जेब में रखा जा सकता है। फुल स्लीव, घुटनों तक लंबाई और सिर ढकने वाली कैप के साथ उपलब्ध यह रेनकोट पहनने और उतारने में भी बेहद आसान है। यही कारण है कि खेतों में धान रोपाई, बागानों में काम, बाजार आने-जाने और बाइक चलाने जैसे लगभग हर काम में लोग इसका इस्तेमाल कर रहे हैं।
गांव से शहर तक बढ़ी मांग
बारिश के दौरान सडक़ों पर निकलने वाले अधिकांश दोपहिया वाहन चालक इसी रेनकोट में नजर आते हैं। खेतों और बागानों में काम करने वाले मजदूरों और किसानों के बीच भी इसकी लोकप्रियता तेजी से बढ़ी है। हल्के वजन और कम कीमत के कारण इसे खराब होने की चिंता के बिना रोजमर्रा के उपयोग में लाया जा रहा है।
स्थानीय बाइक चालक राकेश कुंब्र का कहना है कि हर साल महंगे रेनकोट पर हजारों रुपए खर्च करने से बेहतर है कि 100 रुपए का यह रेनकोट लिया जाए। बाइक चलाने के साथ-साथ खेत और बागान में काम करते समय भी यह बेहद सुविधाजनक साबित होता है।
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