विधायक बसवराज रायरेड्डी ने 180 एकड़ कृषि भूमि अधिग्रहण रोकने की मांग की
भाजपा ने लगाया दोहरे रवैए का आरोप
कोप्पल. यलबुर्गा विधानसभा क्षेत्र के चंडूर और बेणकल गांवों में प्रस्तावित 770 मेगावाट विद्युत परियोजना के लिए किसानों से करीब 180 एकड़ कृषि भूमि खरीदने की प्रक्रिया का विरोध तेज हो गया है। क्षेत्र के विधायक बसवराज रायरेड्डी ने इस प्रस्ताव को तत्काल वापस लेने की मांग करते हुए जिला प्रशासन तथा केपीसीएल और केपीटीसीएल के प्रबंध निदेशकों को पत्र लिखा है।
रायरेड्डी ने कहा कि यलबुर्गा क्षेत्र आर्थिक रूप से पिछड़ा है और यहां अधिकांश किसान छोटे एवं सीमांत हैं, जिनकी आजीविका पूरी तरह कृषि पर निर्भर है। उनका कहना है कि स्कूल, कॉलेज या अस्पताल जैसी सार्वजनिक परियोजनाओं के लिए सीमित भूमि का अधिग्रहण उचित हो सकता है, लेकिन सैकड़ों एकड़ कृषि भूमि लेने से किसान भूमिहीन और बेरोजगार हो जाएंगे। उन्होंने आग्रह किया कि ऐसी विद्युत परियोजनाएं सरकारी भूमि पर स्थापित की जाएं।
भाजपा का पलटवार
इस मुद्दे पर भाजपा जिला अध्यक्ष नवीन गुलगन्नवर ने विधायक पर दोहरा रवय्या अपनाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि एक ओर विधायक भूमि अधिग्रहण का विरोध कर रहे हैं, जबकि दूसरी ओर उनके करीबी लोगों द्वारा किसानों की जमीन निजी कंपनियों को दिलाने के प्रयास किए जाने के आरोप लग रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि इससे जुड़े वीडियो भी सोशल मीडिया पर प्रसारित हुए हैं।
मेरे नाम पर कोई जमीन न दे
आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए विधायक रायरेड्डी ने कहा कि जनप्रतिनिधि होने के कारण कई लोग स्वयं को उनका करीबी बताकर किसानों से संपर्क करते हैं। उन्होंने किसानों से अपील की कि वे उनके नाम का इस्तेमाल करने वाले किसी भी व्यक्ति के झांसे में न आएं और अपनी भूमि किसी को न बेचें।
रायरेड्डी ने कहा कि उनके विरोध के बावजूद उनके अपने भाई ने तळकल क्षेत्र में प्रति एकड़ 9 लाख रुपए की दर से 49 एकड़ भूमि एक सौर ऊर्जा कंपनी को दी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि इससे उनके रुख में कोई बदलाव नहीं आता और किसानों को अपनी कृषि भूमि बेचने से बचना चाहिए।
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