कर्नाटक सीमा में कथित अवैध खनन प्रकरण में सीबीआई से रिकॉर्ड मांगने की पहल
वन विभाग ने उच्चाधिकारियों को लिखा पत्र
बल्लारी. आंध्र प्रदेश की सीमा से सटे ओबुलापुरम माइनिंग कंपनी (ओएमसी) के कथित अवैध खनन मामले में कर्नाटक वन विभाग ने कार्रवाई तेज कर दी है। बल्लारी के उप वन संरक्षण अधिकारी (डीसीएफ) ने मुख्य वन संरक्षण अधिकारी (सीसीएफ) को पत्र लिखकर सीबीआइ, हैदराबाद की भ्रष्टाचार निरोधक शाखा (एसीबी) से मामले से जुड़े आवश्यक दस्तावेज प्राप्त करने का अनुरोध किया है।
पत्र के अनुसार, जनार्दन रेड्डी के स्वामित्व वाली ओएमसी को आंध्र प्रदेश में 68.5 हेक्टेयर क्षेत्र में खनन की अनुमति थी। आरोप है कि कंपनी ने अंतरराज्यीय सीमा चिह्नों को क्षतिग्रस्त कर कर्नाटक की सीमा में प्रवेश करते हुए अवैध खनन किया और लगभग 29 लाख मीट्रिक टन लौह अयस्क, जिसकी अनुमानित कीमत 884 करोड़ रुपए बताई गई है, का अवैध परिवहन किया।
तकनीकी सर्वेक्षण में सामने आए आरोप
तकनीकी सर्वेक्षणों में कथित रूप से यह सामने आया है कि कंपनी ने आंध्र प्रदेश की अनुमति के बावजूद कर्नाटक के खनन क्षेत्र में अतिक्रमण किया। इसी आधार पर पिछले सप्ताह केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने कर्नाटक के खान एवं भू-विज्ञान विभाग को मामले में आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश दिए थे।
वन विभाग के अधिकारियों ने बताया कि पिछले डेढ़ दशक में अवैध खनन से संबंधित विभिन्न सर्वेक्षण रिपोर्टों और न्यायालयों के निर्णयों में भी राज्य की सीमा में अतिक्रमण और अवैध खनन के आरोपों का उल्लेख किया गया है।
बल्लारी वन प्रभाग के डीसीएफ ने उच्चाधिकारियों को भेजे पत्र के साथ संबंधित सर्वेक्षण रिपोर्टें भी संलग्न की हैं। मामले में आगे की कार्रवाई संबंधित एजेंसियों से प्राप्त दस्तावेजों और जांच के निष्कर्षों के आधार पर की जाएगी।
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