दोपहर 1 से 3 बजे तक अंतरिम व्यवस्था
एएसआई को संरचनात्मक बदलाव नहीं करने का निर्देश
नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने मध्य प्रदेश के धार स्थित विवादित भोजशाला परिसर से जुड़े मामले में अंतरिम व्यवस्था करते हुए मुस्लिम पक्ष को दोपहर 1 से 3 बजे तक नमाज अदा करने की अनुमति देने का निर्देश दिया है। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि यह व्यवस्था याचिकाओं के अंतिम निर्णय तक ही प्रभावी रहेगी।
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत तथा न्यायाधीश जॉयमाला बागची और वी. मोहन की पीठ ने भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) को भी निर्देश दिया कि न्यायालय की अनुमति के बिना परिसर में किसी प्रकार का संरचनात्मक परिवर्तन नहीं किया जाए।
पीठ ने कहा कि भोजशाला विवाद अत्यंत संवेदनशील है। इसलिए दोनों पक्षों को संयम बरतना चाहिए और ऐसे बयान देने से बचना चाहिए, जिनसे अनावश्यक विवाद या गलत संदेश जाए। न्यायालय ने कहा कि मामले से जुड़ी प्रत्येक अभिव्यक्ति पर वह गंभीरता और सावधानी से विचार कर रहा है।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अंतरिम राहत से संबंधित आवेदन पहली बार उसके समक्ष आया है। न्यायालय ने मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय के आदेश तथा कानून-व्यवस्था की स्थिति को ध्यान में रखते हुए यह अंतरिम व्यवस्था की है। साथ ही संकेत दिया कि मामले की अगली सुनवाई 10 से 15 दिनों के भीतर सूचीबद्ध की जाएगी।
उल्लेखनीय है कि मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय ने 15 मई को अपने निर्णय में धार स्थित भोजशाला-कमाल मौला मस्जिद परिसर को देवी सरस्वती को समर्पित मंदिर माना था। इस फैसले को चुनौती देते हुए कई याचिकाएं सुप्रीम कोर्ट में दायर की गई हैं। सुनवाई के दौरान मुस्लिम पक्ष की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता हुजैफा अहमदी और अधिवक्ता निजाम पाशा ने मामले की शीघ्र सुनवाई का आग्रह किया था।
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