वर्षा संकट से जूझ रहे कर्नाटक के 25 जिले
रायचूर में किसानों का पलायन शुरू
महाराष्ट्र की बारिश से सीमा पर आठ पुल डूबे
रायचूर/बेलगावी. कर्नाटक में इस वर्ष मानसून का असंतुलित स्वरूप गंभीर चिंता का कारण बन गया है। राज्य के अधिकांश हिस्सों में वर्षा की भारी कमी से सूखे जैसे हालात पैदा हो गए हैं, जबकि महाराष्ट्र के पश्चिमी घाट में हो रही मूसलाधार बारिश ने सीमावर्ती इलाकों में बाढ़ का खतरा बढ़ा दिया है। परिणामस्वरूप एक ओर खेत सूख रहे हैं, किसान पलायन को मजबूर हैं, तो दूसरी ओर नदियां उफान पर हैं और निचले क्षेत्र जलमग्न होने लगे हैं।
25 जिलों में सामान्य से कम बारिश
2४ जुलाई तक राज्य में 253 मिमी वर्षा दर्ज की गई, जबकि इस अवधि में सामान्य वर्षा 392 मिमी होनी चाहिए थी। इस प्रकार कर्नाटक में कुल वर्षा की कमी 35 प्रतिशत दर्ज की गई है। 31 जिलों में से केवल छह जिलों में ही सामान्य वर्षा हुई है, जबकि 25 जिलों में 20 प्रतिशत से अधिक कमी बनी हुई है। विजयनगर जिले में 60 प्रतिशत से अधिक वर्षा की कमी दर्ज की गई है, जो राज्य में सबसे अधिक है। मैसूर और हावेरी में भी क्रमश: 57 और 50 प्रतिशत कम वर्षा हुई है।
मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि अरब सागर पर कमजोर पवन प्रवाह तथा बंगाल की खाड़ी में मानसूनी निम्न दबाव प्रणाली विकसित नहीं होने के कारण राज्य में अपेक्षित वर्षा नहीं हो सकी। हालांकि जुलाई में कई जिलों में जून की तुलना में अधिक बारिश हुई, फिर भी सामान्य औसत पूरा नहीं हो पाया। बागलकोट एकमात्र जिला रहा, जहां सामान्य से अधिक वर्षा दर्ज की गई।
सूखे ने छीनी किसानों की आजीविका
सूखे की सबसे भयावह तस्वीर रायचूर जिले से सामने आई है। बारिश नहीं होने से कपास, अरहर सहित खरीफ की फसलें सूख गई हैं। किसानों ने प्रति एकड़ 40 से 50 हजार रुपए खर्च कर बुवाई की थी, लेकिन फसल नष्ट होने से कर्ज का बोझ बढ़ गया है। रायचूर तालुक के हूगनहल्ली गांव में 90 घरों में से 30 से अधिक घरों पर ताले लटक गए हैं। परिवार बच्चों का स्कूल छोडक़र बेंगलूरु, हैदराबाद और पुणे जैसे शहरों की ओर मजदूरी के लिए पलायन कर रहे हैं। ग्रामीणों ने सरकार से जिले को तत्काल सूखाग्रस्त घोषित करने और राहत पैकेज देने की मांग की है।
सीमावर्ती क्षेत्रों में बाढ़ का खतरा
दूसरी ओर महाराष्ट्र के पश्चिमी घाट में लगातार हो रही भारी बारिश का असर कर्नाटक के बेलगावी जिले के चिक्कोडी और निप्पाणी तालुक में दिखाई दे रहा है। कृष्णा नदी में लगभग 90 हजार क्यूसेक पानी बह रहा है, जबकि दूधगंगा और वेदगंगा नदियां भी उफान पर हैं। आठ निचले पुल जलमग्न हो चुके हैं और कल्लोल बैराज के समीप स्थित दत्त मंदिर भी पानी में डूब गया है। नदी का जलस्तर बढऩे से निचले इलाकों की कृषि भूमि के जलमग्न होने की आशंका से किसानों की चिंता बढ़ गई है।
चुनौतीपूर्ण बना मानसून का असंतुलन
कर्नाटक में मानसून का यह असंतुलित स्वरूप प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बन गया है। जहां एक ओर सूखाग्रस्त क्षेत्रों में राहत एवं रोजगार की आवश्यकता महसूस की जा रही है, वहीं सीमावर्ती इलाकों में बाढ़ से बचाव और नदी तटीय गांवों की सुरक्षा के लिए सतर्कता बढ़ा दी गई है। कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि यदि आगामी दिनों में व्यापक और संतुलित वर्षा नहीं हुई, तो खरीफ उत्पादन पर गंभीर असर पड़ सकता है और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर इसका दूरगामी प्रभाव दिखाई देगा।
Breaking News सबसे पहले पाना चाहते हैं?
अभी हमारे WhatsApp Channel को join करें
हर खबर सबसे पहले
Join करें : https://whatsapp.com/channel/0029Vb7S2RA65yD9fZX4Og1Z

