चुनावी रणनीति, पिछड़ा वर्ग समीकरण और बांगारप्पा परिवार से जुड़ाव बना प्रमुख आधार
वरिष्ठ कांग्रेस विधायक फिर रह गए प्रतीक्षा में
शिवमोग्गा। कर्नाटक मंत्रिमंडल के दूसरे चरण के विस्तार में कांग्रेस ने एक बार फिर मधु बंगारप्पा पर भरोसा जताते हुए उन्हें मंत्री बनाया है। इससे यह स्पष्ट संकेत मिला है कि पार्टी आगामी चुनावों को ध्यान में रखकर संगठनात्मक क्षमता, सामाजिक समीकरण और राजनीतिक प्रभाव को प्राथमिकता दे रही है। वहीं, लंबे समय से मंत्री पद की उम्मीद लगाए बैठे वरिष्ठ विधायक बी.के. संगमेश्वर और गोपालकृष्ण बेलूर को एक बार फिर निराशा हाथ लगी।
चुनावी रणनीति और सामाजिक समीकरण
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि शिवमोग्गा जिले में भाजपा के मजबूत आधार को चुनौती देने के लिए कांग्रेस को ऐसे चेहरे की जरूरत थी, जिसकी संगठन पर मजबूत पकड़ हो और जिसका प्रभाव विधानसभा क्षेत्र से आगे भी हो। पिछड़ा वर्ग, विशेषकर ईडिगा समुदाय में पूर्व मुख्यमंत्री एस. बंगारप्पा परिवार की स्वीकार्यता को भी निर्णय का अहम आधार माना जा रहा है।
बंगारप्पा परिवार से जुड़ाव भी बना कारण
राजनीतिक हलकों में यह भी चर्चा है कि मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार के राजनीतिक जीवन में दिवंगत एस. बंगारप्पा की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। ऐसे में मधु बंगारप्पा को दोबारा मंत्रिमंडल में शामिल किए जाने को उस राजनीतिक संबंध की निरंतरता के रूप में भी देखा जा रहा है।
शिक्षा मंत्री के रूप में बनाई पहचान
शिक्षा मंत्री के रूप में मधु बंगारप्पा ने सरकारी विद्यालयों के विकास के लिए कॉरपोरेट सीएसआर से लगभग 5,000 करोड़ रुपए जुटाने, नम्मा शाले-नम्मा (हमारी स्कूल-हमारी) जिम्मेदारी अभियान के तहत जनसहयोग बढ़ाने, एसएसएलसी और पीयूसी में तीन परीक्षा प्रणाली लागू करने तथा रिकॉर्ड परीक्षा परिणाम जैसे कदमों से अपनी अलग पहचान बनाई।
वरिष्ठ नेताओं में असंतोष
दूसरी ओर, लगातार कई बार विधायक चुने जाने के बावजूद मंत्री पद से वंचित रहे वरिष्ठ नेताओं और उनके समर्थकों में निराशा देखी जा रही है। इससे जिले की कांग्रेस राजनीति में नए समीकरणों और अंदरूनी असंतोष को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं।
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