नगर सफाईकर्मी के बेटे से मंत्री तक: के.एस. बसवंतप्पा की प्रेरक राजनीतिक यात्राके.एस. बसवंतप्पा।

किराये के मकान में रहने वाले पहली बार के विधायक को मिली मंत्री पद की जिम्मेदारी

मायकोंडा में विकास की उम्मीदें बढ़ीं

दावणगेरे। साधारण परिवार से निकलकर मंत्री पद तक पहुंचने वाले के.एस. बसवंतप्पा की राजनीतिक यात्रा चर्चा का विषय बन गई है। दावणगेरे जिले की मायकोंडा (अनुसूचित जाति) विधानसभा सीट से पहली बार विधायक चुने गए बसवंतप्पा को मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार मंत्रिमंडल में स्थान मिला है। उनके पिता नगर निगम में सफाईकर्मी थे और स्वयं बसवंतप्पा आज भी किराये के मकान में रहते हैं। उनकी सादगी और जनसंपर्क की शैली उन्हें अन्य नेताओं से अलग पहचान दिलाती है।

गांव से विधानसभा, अब मंत्रिमंडल तक

बसवंतप्पा ने राजनीति की शुरुआत ग्राम स्तर से की और जिला पंचायत सदस्य के रूप में जनसेवा की। वर्ष 2018 में विधानसभा चुनाव हारने के बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी। 2023 में पहली बार विधायक बने और अपने पहले ही कार्यकाल में मंत्री बनने का अवसर प्राप्त कर लिया।

सामाजिक समीकरण भी बने अहम आधार

राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार मध्य कर्नाटक में मादिगा समुदाय के प्रभाव और इस वर्ग में कांग्रेस की पकड़ मजबूत करने की रणनीति के तहत बसवंतप्पा को मंत्रिमंडल में शामिल किया गया है। पूर्व मंत्री एच. आंजनेय के बाद इस समुदाय के प्रभावशाली नेतृत्व की कमी भी इस निर्णय का एक कारण मानी जा रही है।

मायकोंडा को विकास की नई उम्मीद

बसवंतप्पा के मंत्री बनने से मायकोंडा को अधिक विकास निधि मिलने, सडक़ एवं आधारभूत संरचना परियोजनाओं में तेजी आने तथा लंबे समय से लंबित मायकोंडा को तालुक मुख्यालय बनाने की मांग पूरी होने की उम्मीद बढ़ी है।

यह भी उल्लेखनीय है कि 2009 के बाद पहली बार दावणगेरे जिले को दो मंत्री मिले हैं और जिले के इतिहास में पहली बार दलित समुदाय के एक नेता को मंत्री पद प्राप्त हुआ है।

 

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By Bharat Ki Awaz

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