एसआइआर पर घमासान, 1.08 करोड़ नामों पर सवालएसआइआर पर घमासान, 1.08 करोड़ नामों पर सवाल

‘नागरिक मत कावलु समिति’ का दावा—25 जिलों के 100 बूथों का सर्वे शुरू

हुब्बल्ली। कर्नाटक में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआइआर) की ड्राफ्ट सूची को लेकर विवाद तेज हो गया है। ‘नागरिक मत कावलु समिति’ ने दावा किया है कि एक करोड़ से अधिक मतदाताओं के नाम ड्राफ्ट सूची से बाहर हुए हैं। समिति ने वास्तविक स्थिति की जांच के लिए 25 जिलों के 100 मतदान केंद्रों पर नमूना सर्वे शुरू करने की जानकारी दी है। सर्वे की रिपोर्ट 30 सितंबर को राज्य सरकार और चुनाव आयोग को सौंपने की बात कही गई है।

हालांकि, चुनाव आयोग के उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार 16 जून को राज्य में 5.54 करोड़ मतदाता थे। एसआइआर के बाद 24 अगस्त को जारी ड्राफ्ट सूची में 4.46 करोड़ मतदाता दर्ज हैं और करीब 1.08 करोड़ मतदाता एएसडीडीओ श्रेणी में चिह्नित किए गए हैं। इसमें अनुपस्थित, स्थानांतरित, मृत, दोहरे और अन्य मामलों को शामिल किया गया है। आयोग के अनुसार इसे अंतिम रूप से नाम काटना नहीं माना जा सकता और पात्र मतदाताओं को निर्धारित प्रक्रिया के तहत दावा करने का अवसर दिया गया है।

66 लाख नाम स्थानांतरण के आधार पर हटाने का दावा

समिति के सदस्य के.एल. अशोक ने आरोप लगाया कि करीब 66 लाख नाम केवल निवास स्थान बदलने के आधार पर सूची से बाहर किए गए और कई मतदाताओं को सुधार का पर्याप्त अवसर नहीं मिला। समिति ने फॉर्म-6 और फॉर्म-8 के इस्तेमाल तथा मतदाताओं को सूचना देने की प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए हैं।

दूसरी ओर, चुनाव संबंधी रिपोर्टों के अनुसार एएसडीडीओ श्रेणी में चिह्नित मतदाताओं को दावे-आपत्तियां दर्ज कराने और पात्र होने पर पुन: सूची में शामिल होने की प्रक्रिया उपलब्ध है। 18 सितंबर तक करीब 6.5 लाख लोगों ने पुन: शामिल होने के लिए आवेदन किया था।

बूथ स्तर पर जांच की तैयारी

समिति के अनुसार पुराने मतदाता आंकड़ों, वर्तमान ड्राफ्ट सूची और बाहर किए गए नामों का बूथवार मिलान किया जाएगा। समिति के प्रतिनिधियों ने दावा किया कि गरीब, श्रमिक और दस्तावेजों से वंचित मतदाताओं के अधिकार प्रभावित हो सकते हैं। इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि होना बाकी है।

समिति के प्रकाश राज ने कहा कि एसआइआर में सामने आई कथित त्रुटियों को समय रहते दूर करना जरूरी है। वहीं के.एल. अशोक ने 30 सितंबर को बेंगलूरु में मंत्रियों को ज्ञापन देने तथा 1 अक्टूबर को नई दिल्ली में विभिन्न राज्यों की समितियों की संयुक्त प्रेस वार्ता की जानकारी दी।

 

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By Bharat Ki Awaz

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