दो नौकाएं समुद्र में डूबीं, लाखों का नुकसान
प्रवेश मार्ग में रेत जमने से बढ़ा हादसों का खतरा
कारवार। उत्तर कन्नड़ जिले के कुमटा तालुक स्थित तदड़ी मछली पकडऩे के बंदरगाह में गाद और रेत जमा होने की समस्या मछुआरों के लिए गंभीर संकट बन गई है। राज्य में 1 अगस्त से गहरे समुद्र में मछली पकडऩे का मौसम शुरू होने के बाद महज दो सप्ताह में यहां पांच मछली पकडऩे वाली नौकाएं क्षतिग्रस्त हो चुकी हैं। इनमें से दो नौकाएं पूरी तरह डूब गईं, जिससे मछुआरों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा है।
प्रवेश मार्ग में रेत के टीले बने खतरा
मछुआरों के अनुसार, बंदरगाह में प्रवेश करने वाले ‘अलिवे’ क्षेत्र में बड़ी मात्रा में गाद और रेत जमा है। समुद्र में जाते या लौटते समय तेज लहरों के कारण नौकाएं रेत के टीलों से टकरा जाती हैं। इससे नौका के निचले हिस्से में क्षति पहुंचती है और पानी भरने के कारण नौकाएं डूब जाती हैं।
गाद निकासी के काम पर सवाल
हर वर्ष राज्य के तटीय जिलों, विशेषकर उत्तर कन्नड़, दक्षिण कन्नड़ और उडुपी के मछली बंदरगाहों में गाद निकालने के लिए करोड़ों रुपए का प्रावधान किया जाता है। पिछले गर्मी के मौसम में तदड़ी बंदरगाह में भी गाद निकालने का काम किया गया था। हालांकि, स्थानीय मछुआरों ने शुरुआत से ही ठेकेदार कंपनी पर काम नहीं करने का आरोप लगाया था।
मछुआरों का कहना है कि विरोध के बावजूद ठेकेदार ने केवल औपचारिक रूप से कुछ गाद हटाई और काम अधूरा छोड़ दिया। अब मछली पकडऩे का मौसम शुरू होते ही इसका असर हादसों के रूप में सामने आ रहा है।
एक नाव डूबने पर 15-20 लाख का नुकसान
मछुआरों के अनुसार, एक ट्रॉल नाव के डूबने पर करीब 15 से 20 लाख रुपए का नुकसान होता है। पहले ही दो नावें डूब चुकी हैं। दोनों को किनारे तक नहीं लाया जा सका और वे समुद्र में ही हैं। क्षतिग्रस्त तीन नावों को किसी तरह किनारे लाया गया है।
प्रत्येक नाव में कम से कम चार मछुआरे सवार रहते हैं। हादसों के दौरान आसपास मौजूद अन्य मछुआरों की मदद से अब तक जनहानि टली है, लेकिन लगातार बने इस खतरे से मछुआरों की जान पर भी संकट मंडरा रहा है।
तत्काल गाद निकालने की मांग
मछुआरों ने बंदरगाह विभाग और मत्स्य विभाग से संयुक्त रूप से समस्या का समाधान करने की मांग की है। उनका कहना है कि अधिकारियों को बैठक कर गाद निकालने का काम व्यवस्थित ढंग से कराने के निर्देश देने चाहिए। मछुआरों ने चेतावनी दी कि यदि तदड़ी बंदरगाह के प्रवेश मार्ग से गाद और रेत तत्काल नहीं हटाई गई तो भविष्य में बड़े हादसे हो सकते हैं।
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