राज्य में रागी की बुवाई 80 फीसदी घटी, लेकिन दावणगेरे में लक्ष्य से ढाई गुना अधिक क्षेत्र में खेती
समर्थन मूल्य बढक़र 5,205 रुपए
दावणगेरे। राज्य के अधिकांश हिस्सों में बारिश की कमी से रागी की बुवाई बुरी तरह प्रभावित हुई है, लेकिन दावणगेरे जिले में सूखे की स्थिति किसानों के लिए रागी की खेती का अवसर बन गई है। धान के लिए प्रसिद्ध जिले में इस बार रागी की बुवाई रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई है। निर्धारित लक्ष्य की तुलना में रागी का रकबा 257.99 फीसदी बढ़ा है।
मक्का सूखा तो रागी का सहारा
मक्का की फसल में कीट प्रकोप बढऩे के बावजूद किसान इसकी खेती करते रहे थे। इस बार बारिश की कमी के कारण मक्का की फसल सूखने लगी तो कई किसानों ने उसे हटाकर रागी की बुवाई कर दी। दक्षिण आंतरिक कर्नाटक के अन्य जिलों की तुलना में दावणगेरे में बारिश की कमी अपेक्षाकृत कम रही। रुक-रुककर हुई बारिश से रागी की फसल भी अच्छी स्थिति में है।
राज्य में 6 लाख हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र खाली
राज्य में रागी की बुवाई का लक्ष्य 8,20,383 हेक्टेयर था, लेकिन अब तक केवल 2,05,023 हेक्टेयर में ही बुवाई हो सकी है। यानी करीब छह लाख हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र में रागी की बुवाई नहीं हो पाई है।
रागी उत्पादन में अग्रणी तुमकूरु जिले में भी 1,66,643 हेक्टेयर के लक्ष्य के मुकाबले केवल 38,183 हेक्टेयर में बुवाई हुई है। तुमकूरु, कोलार, हासन, चित्रदुर्ग और चिक्कबल्लापुर जैसे प्रमुख रागी उत्पादक जिलों में बारिश की कमी के कारण बुवाई आधे लक्ष्य तक भी नहीं पहुंची है। इससे आने वाले दिनों में रागी की आवक घटने और कीमत बढऩे की संभावना जताई जा रही है।
दावणगेरे में लक्ष्य से 257.99 प्रतिशत अधिक
दावणगेरे में खरीफ मौसम में 13,659 हेक्टेयर रागी बुवाई का लक्ष्य था, जबकि अब तक 35,239 हेक्टेयर में बुवाई हो चुकी है। यह लक्ष्य से 257.99 फीसदी अधिक है। अगस्त के अंत तक बुवाई का समय होने से यदि भद्रा जलाशय से सिंचाई के लिए पानी नहीं छोड़ा गया तो धान की जगह रागी की खेती करने वाले किसानों की संख्या और बढ़ सकती है।
वरिष्ठ सहायक कृषि निदेशक श्रीधरमूर्ति के अनुसार, वर्ष 2023 में भी बारिश की कमी के दौरान किसानों ने धान के खेतों में रागी की खेती का प्रयोग किया था, जो सफल रहा था।
समर्थन मूल्य भी बढ़ा
केंद्र सरकार ने पिछले वर्ष रागी का न्यूनतम समर्थन मूल्य 4,886 रुपए प्रति क्विंटल रखा था। इस वर्ष इसमें 319 रुपए की वृद्धि कर 5,205 रुपए प्रति क्विंटल कर दिया गया है। राज्य सरकार की ओर से भी अतिरिक्त प्रोत्साहन राशि मिलने पर रागी किसानों को और लाभ हो सकता है।
कन्नड़ साहित्य में कनकदास की ‘रामधान्य चरित्रे’ में रागी और चावल के प्रतीक के माध्यम से सामाजिक समानता का संदेश दिया गया है। इस बार दावणगेरे ही नहीं, पूरे राज्य में रागी की खेती का बदलता परिदृश्य मानो आधुनिक ‘रामधान्य चरित्रे’ की नई तस्वीर पेश कर रहा है।
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