गणेशोत्सव से पहले रसोई पर महंगाई की ट्रिपल मार
चीनी 70 रुपए किलो तक पहुंची, महालिंगपुर में गुड़ 7,200 रुपए क्विंटल; प्याज भी 75 रुपए किलो तक महंगा
हुब्बल्ली/बागलकोट। गणेशोत्सव से पहले उत्तर कर्नाटक की रसोई पर महंगाई की ट्रिपल मार पड़ी है। मिठाई बनाने के लिए चीनी महंगी हो गई है, मुंह मीठा करने के लिए गुड़ के दाम बढ़ गए हैं और भोजन के तडक़े में इस्तेमाल होने वाला प्याज भी महंगा हो गया है। तीनों जरूरी खाद्य वस्तुओं की कीमतों में एक साथ वृद्धि ने आम उपभोक्ताओं का घरेलू बजट बिगाड़ दिया है।
हुब्बल्ली-धारवाड़ के खुदरा बाजार में करीब एक महीने पहले 50-52 रुपए किलो बिकने वाली चीनी अब 65 से 70 रुपए किलो तक पहुंच गई है। गणेश चतुर्थी के बाद दशहरा और दीपावली जैसे त्योहार आने वाले हैं, जिनमें मिठाइयों की मांग बढ़ती है। ऐसे में चीनी की कीमत में अचानक हुई वृद्धि ने उपभोक्ताओं की चिंता बढ़ा दी है।
व्यापारियों का कहना है कि पहले एक किलो चीनी के साथ करीब 250 ग्राम चायपत्ती मुफ्त देने जैसी योजनाएं चलती थीं, लेकिन अब चीनी के दाम कम करना भी मुश्किल हो गया है। चीनी की बढ़ती कीमत का असर होटल, बेकरी और मिठाई कारोबार पर भी पड़ रहा है। लड्डू, बर्फी सहित अन्य मिठाइयों के दाम बढ़ाने की तैयारी शुरू हो गई है। होटल और चाय-कॉफी दुकानों में भी लागत का हिसाब लगाया जा रहा है।
प्याज के दाम भी बढ़े
एक सप्ताह पहले करीब 50 रुपए किलो बिकने वाला प्याज अब 60 से 65 रुपए किलो तक पहुंच गया है। कुछ बाजारों में इसकी कीमत 75 रुपए किलो तक बताई जा रही है। स्थानीय बाजार में प्याज की आवक कम होने से कीमतों में तेजी आई है। थोक व्यापारियों का अनुमान है कि यदि यही स्थिति बनी रही तो प्याज की कीमत 100 रुपए किलो के पार भी जा सकती है।
इस वर्ष मानसून की कमी के कारण स्थानीय किसानों ने प्याज की खेती कम की। इससे उत्पादन में करीब 70 प्रतिशत तक गिरावट आने की बात कही जा रही है। परिणामस्वरूप बाजार में प्याज का स्टॉक घट गया है। फिलहाल कर्नाटक और महाराष्ट्र के सीमित क्षेत्रों से ही प्याज की आपूर्ति हो रही है।
हुब्बल्ली एपीएमसी में बेलगावी और गदग जिलों के विभिन्न तालुकों तथा बागलकोट से प्याज पहुंच रहा है। इसके अलावा महाराष्ट्र के सोलापुर, पुणे और अहमदनगर से भी आवक हो रही है। यहां से प्याज कर्नाटक के विभिन्न शहरों के साथ उत्तर भारत के बाजारों में भेजा जाता है।
हुब्बल्ली एपीएमसी के अनुसार 17 अगस्त को 2,100 क्विंटल, 18 अगस्त को 2,350 क्विंटल, 19 अगस्त को 960 क्विंटल, 20 अगस्त को 1,240 क्विंटल और 21 अगस्त को 1,620 क्विंटल प्याज की आवक हुई। इस तरह पांच दिनों में कुल 8,270 क्विंटल प्याज बाजार में पहुंचा।
प्याज व्यापारी दीपक पाटील ने बताया कि फिलहाल गदग, बेलगावी, बागलकोट और महाराष्ट्र से प्याज आ रहा है। आवक घटने के कारण कीमत बढ़ी है। नई प्याज की फसल बाजार में आने के बाद कीमतों में कमी आने की संभावना है।
होटल व्यवसायी विजय जरतारघर ने कहा कि प्याज की कीमत लंबे समय से स्थिर थी, लेकिन अब अचानक बढ़ गई है। होटल में रोज बड़ी मात्रा में प्याज की जरूरत पड़ती है। कम प्याज खरीदने पर ग्राहक भोजन के साथ प्याज मांगते हैं, जबकि अधिक खरीदने पर लागत बढ़ जाती है।
गुड़ भी रिकॉर्ड स्तर पर
चीनी के महंगे होने के साथ गुड़ की मांग भी बढ़ गई है। बागलकोट जिले के महालिंगपुर एपीएमसी बाजार में गुड़ की कीमत पहली बार 7,200 रुपए प्रति क्विंटल के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई है।
करीब छह दिन पहले यही गुड़ 5,300 रुपए प्रति क्विंटल बिक रहा था। सामान्य दिनों में यहां गुड़ का औसत भाव करीब 4,500 रुपए प्रति क्विंटल रहता था। त्योहारों के दौरान मांग बढऩे के साथ चीनी महंगी होने के कारण लोग गुड़ की ओर रुख कर रहे हैं। मांग अधिक और आपूर्ति कम होने से कीमत में तेजी आई है।
महालिंगपुर को गुड़ के प्रमुख बाजार के रूप में जाना जाता है। यहां का गुड़ गुजरात, तमिलनाडु और महाराष्ट्र समेत कई राज्यों में भेजा जाता है। वर्ष 2024-25 में महालिंगपुर एपीएमसी में 1,13,563 क्विंटल गुड़ का कारोबार हुआ था।
एपीएमसी सचिव धनराज पट्टनशेट्टी ने बताया कि लगातार त्योहार होने से गुड़ की मांग बढ़ी है, लेकिन मांग की तुलना में आपूर्ति कम है। कीमत बढऩे से किसानों को लाभ मिलेगा और दीपावली तक कीमत घटने की संभावना कम है।
अलग-अलग बाजारों में गुड़ के भाव

त्योहारों के मौसम में चीनी, गुड़ और प्याज की कीमतों में एक साथ हुई वृद्धि ने आम परिवारों के लिए गणेशोत्सव का खर्च बढ़ा दिया है। उपभोक्ताओं का कहना है कि इन तीनों के बिना न तो रोजमर्रा की रसोई आसानी से चल सकती है और न ही त्योहारों की पारंपरिक मिठास बरकरार रखी जा सकती है।
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