कर्नाटक में 2.38 लाख एचआइवी संक्रमितएचआइवी।

बेंगलूरु-बेलगावी में सबसे ज्यादा मामल

देश में संक्रमितों की संख्या के लिहाज से कर्नाटक तीसरे पायदान पर

हुब्बल्ली। कर्नाटक में एचआइवी संक्रमण की तस्वीर चिंता बढ़ाने वाली है। राष्ट्रीय एड्स नियंत्रण संगठन (एनएसीओ) की राष्ट्रीय रिपोर्ट के सातवें संस्करण के अनुसार राज्य में 2,38,327 एचआइवी संक्रमित दर्ज हैं। इनमें बेंगलूरु और बेलगावी जिले सबसे आगे हैं। संक्रमितों की संख्या के लिहाज से कर्नाटक देश में तीसरे स्थान पर है।

ग्रेटर बेंगलूरु में 30 हजार से ज्यादा संक्रमित

राज्य में एचआइवी संक्रमण का सबसे बड़ा केंद्र ग्रेटर बेंगलूरु प्राधिकरण क्षेत्र सामने आया है, जहां 30,273 संक्रमित दर्ज हैं। इसके बाद बेलगावी में 25,311 और बागलकोट में 20,389 मामले हैं। मैसूरु में 12,713 तथा विजयपुर में 12,171 संक्रमित दर्ज किए गए हैं।

जिलेवार आंकड़ों में अंतर

रायचूर 9,028, धारवाड़ 7,889, कलबुर्गी 7,809, मंड्या 7,615, कोप्पल 7,150, बल्लारी 6,593, हासन 5,869, दक्षिण कन्नड़ 5,540, कोलार 5,495 और चित्रदुर्ग 5,287 संक्रमितों के साथ प्रमुख जिलों में शामिल हैं। वहीं कोडगु में 1,520 तथा उत्तर कन्नड़ में 2,585 मामले दर्ज हैं।

जागरूकता से लेकर जांच और उपचार तक अभियान, 7,700 शिक्षण संस्थानों के विद्यार्थियों तक पहुंच

एचआइवी संक्रमण की रोकथाम के लिए राज्यभर में 7,700 स्कूलों और प्री-यूनिवर्सिटी (पीयू) कॉलेजों के विद्यार्थियों को किशोर शिक्षा कार्यक्रम के जरिए जागरूक किया जा रहा है। युवाओं में जागरूकता बढ़ाने के लिए 1,756 रेड रिबन क्लब भी सक्रिय हैं।

फ्लैश मॉब से एलइडी स्क्रीन तक

बस स्टैंड, रेलवे स्टेशन, बाजार और अन्य सार्वजनिक स्थलों पर फ्लैश मॉब आयोजित किए जा रहे हैं। बेंगलूरु के अपार्टमेंट परिसरों की एलिवेटर लॉबी में एलसीडी/एलइडी स्क्रीन के जरिए संदेश प्रसारित किए जा रहे हैं। सिनेमा हॉल, बस स्टैंड, होर्डिंग और लोककला दलों के माध्यम से भी एचआइवी से बचाव की जानकारी दी जा रही है।

पंचायतों तक पहुंचा अभियान

ग्राम पंचायत सदस्यों तथा विभिन्न विभागों से जुड़े प्रतिनिधियों को प्रशिक्षण देकर एचआइवी/एड्स के प्रति जागरूक किया जा रहा है। संक्रमण की रोकथाम के लिए मोबिलाइजेशन फॉर एड्स सुरक्षा (एमएएस)-2 कार्यकरम भी लागू किया गया है।

पूर्ण नियंत्रण की राह में बड़ी चुनौतियां, सहमति के बिना जांच नहीं

एचआइवी एवं एड्स (रोकथाम एवं नियंत्रण) अधिनियम, 2017 के प्रावधानों के कारण एचआइवी जांच सामान्य रूप से व्यक्ति की सहमति के बिना अनिवार्य नहीं की जा सकती। ऐसे में स्वैच्छिक जांच को बढ़ावा देना जरूरी है।

संक्रमण का स्थायी इलाज नहीं

एचआइवी को पूरी तरह समाप्त करने वाली उपचार पद्धति अभी उपलब्ध नहीं है। एंटीरेट्रोवायरल थेरेपी (एआरटी) संक्रमित व्यक्ति की जीवन प्रत्याशा और स्वास्थ्य को बेहतर बनाने में मदद करती है, लेकिन वायरस को शरीर से पूरी तरह खत्म नहीं करती।

बदलते सामाजिक संपर्क भी चुनौती

सोशल मीडिया और डेटिंग ऐप्स के बढ़ते इस्तेमाल से नए सामाजिक संपर्कों का दायरा बढ़ रहा है। ऐसे मामलों में संपर्कों की पहचान और कॉन्टैक्ट ट्रेसिंग कठिन हो सकती है। इसलिए जागरूकता, सुरक्षित व्यवहार, स्वैच्छिक जांच और समय पर उपचार संक्रमण नियंत्रण की कुंजी हैं।

एचआइवी से लड़ाई केवल उपचार से नहीं, बल्कि जागरूकता, समय पर जांच, भेदभाव खत्म करने और सुरक्षित व्यवहार को बढ़ावा देने से मजबूत होगी।

प्रमुख आंकड़े — एक नजर में

क्षेत्र/जिला — एचआइवी संक्रमित

ग्रेटर बेंगलूरु प्राधिकरण — 30,273
बेलगावी — 25,311
बागलकोट — 20,389
मैसूरु — 12,713
विजयपुर — 12,171
रायचूर — 9,028
धारवाड़ — 7,889
कलबुर्गी — 7,809
मंड्या — 7,615
कोप्पल — 7,150
कर्नाटक में कुल — 2,38,327

 

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By Bharat Ki Awaz

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