शिक्षक दिवस पर शिक्षा और समानता पर जोर
हुब्बल्ली। बाबू जगजीवनराम सामुदायिक भवन में शनिवार को आयोजित शिक्षक दिवस समारोह में विधायक प्रसाद अब्बय्या ने कहा कि संविधान के माध्यम से डॉ. आंबेडकर ने सभी को शिक्षा का अधिकार दिया है। शिक्षा से ही समाज का विकास संभव है।
‘शिक्षा का व्यापारीकरण नहीं, राष्ट्रीयकरण हो’
अब्बय्या ने कहा कि वर्तमान में शिक्षा का व्यापारीकरण हो रहा है, इसे रोककर राष्ट्रीयकरण करना चाहिए। सरकारी स्कूलों को बचाना जरूरी है और बेटियों को शिक्षा से वंचित न किया जाए। अपने क्षेत्र में सरकारी स्कूलों को हाईटेक बनाया गया है और बिडनाळ में पीयू कॉलेज की मंजूरी दिलाई गई है।
‘तकनीक भी शिक्षकों पर निर्भर’
उन्होंने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआइ) जैसी नई तकनीकें भी शिक्षकों के बिना सफल नहीं हो सकतीं। सरकार ने शिक्षा को मजबूत करने के लिए 15 हजार शिक्षकों और 51 हजार अतिथि शिक्षकों की नियुक्ति की है।
महिला शिक्षा की नींव
विधान परिषद सदस्य एफ.एच. जक्कप्पनवर ने कहा कि सावित्रीबाई फुले और फातिमा शेख ने महिला शिक्षा की नींव रखी थी। आज बड़ी संख्या में महिला शिक्षक उनकी ही देन हैं। उन्होंने दान प्रथा की बढ़ती समस्या पर चिंता जताई और कहा कि गरीब एवं मध्यम वर्ग के लिए शिक्षा सुलभ बनाने के लिए सरकार ने केपीएस स्कूल जैसी योजनाएं शुरू की हैं।
‘जाति व्यवस्था खत्म होनी चाहिए’
जक्कप्पनवर ने कहा कि समाज में जाति व्यवस्था खत्म होनी चाहिए। उन्होंने शिक्षकों से आग्रह किया कि वे बच्चों में जाति या वर्ग के आधार पर भेदभाव न करें और उन्हें समानता व संस्कार सिखाएं।
समारोह में महांतेश बल्लारी द्वारा लिखित ‘दैनिक शिक्षा शिक्षक भर्ती गाइड’ का विमोचन किया गया। कार्यक्रम में चंद्रशेखर शिवयोगी राजयोगींद्र स्वामी सहित कई गणमान्य उपस्थित थे।
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