17 साल की उम्र में सबसे ज्यादा मामले
रायचूर में 100 केस; 14 साल से कम उम्र की 21 बालिकाएं भी शामिल
बाल विवाह के साथ यौन शोषण, गरीबी, पारिवारिक कलह और मानव तस्करी भी प्रमुख कारण
मेंगलूरु। कर्नाटक में बालिकाओं में कम उम्र में गर्भधारण के मामले एक बार फिर चिंता बढ़ा रहे हैं। वर्ष 2026-27 के शुरुआती चार महीनों में ही राज्य में 725 बालिकाओं के गर्भवती होने के मामले दर्ज किए गए हैं। इनमें सबसे अधिक 100 मामले रायचूर जिले के हैं। दक्षिण कन्नड़ में चार और उडुपी में दो मामले सामने आए हैं।
प्रजनन एवं बाल स्वास्थ्य (आरसीएच) पोर्टल के आंकड़ों के अनुसार अप्रेल से जुलाई 2026 के बीच दर्ज 725 मामलों में 17 वर्ष की बालिकाओं की संख्या सर्वाधिक 521 रही। वहीं 16 वर्ष की 127, 15 वर्ष की 56 और 14 वर्ष की 21 बालिकाएं गर्भवती मिलीं। 14 वर्ष से कम उम्र की बालिकाओं में भी मामले सामने आना विशेष चिंता का विषय है। हासन जिले में इस आयु वर्ग के तीन मामले दर्ज हुए हैं।
बाल विवाह ही अकेला कारण नहीं
सामाजिक कार्यकर्ताओं और विशेषज्ञों के अनुसार बाल विवाह के अलावा यौन शोषण, बच्चों के खिलाफ यौन हिंसा, पारिवारिक कलह, गरीबी, घर से दूर होने की परिस्थितियां और मानव तस्करी जैसे कारण भी किशोरियों को कम उम्र में गर्भधारण की स्थिति में पहुंचा रहे हैं।
दो साल में मामले घटे, लेकिन खतरा बरकरार
राज्य में किशोरियों के गर्भधारण के मामलों में पिछले दो वर्षों में कमी जरूर आई है। वर्ष 2024-25 में 4,579 मामले दर्ज हुए थे, जो 2025-26 में घटकर 3,308 रह गए। इसके बावजूद चालू वित्त वर्ष के शुरुआती चार महीनों में 725 मामले सामने आना बताता है कि समस्या अभी खत्म नहीं हुई है।
दक्षिण कन्नड़ में अप्रेल-जुलाई के दौरान चार मामले दर्ज हुए। इनमें 15-16 वर्ष आयु की एक, 16-17 वर्ष की एक और 17-18 वर्ष की दो बालिकाएं शामिल हैं। उडुपी में दर्ज दोनों मामले 16-17 वर्ष आयु वर्ग के हैं।
दक्षिण कन्नड़ में 2024-25 में 24 और 2025-26 में 25 मामले सामने आए थे। उडुपी में दोनों वर्षों में 13-13 मामले दर्ज हुए।
चिंता का पैमाना
वर्ष 2024-25, 2025-26 और 2026-27 के शुरुआती चार महीनों के आंकड़ों को मिलाकर 14 से 17 वर्ष आयु वर्ग में दर्ज मामलों की संख्या 8,612 तक पहुंचती है।
विशेषज्ञों का कहना है कि स्कूल स्तर पर जागरूकता कार्यक्रम, बाल सुरक्षा संबंधी शिक्षा, बाल विवाह पर प्रभावी रोक और यौन अपराधों की त्वरित पहचान एवं कार्रवाई की व्यवस्था को और मजबूत करने की जरूरत है।
“कम उम्र में गर्भधारण का असर केवल स्वास्थ्य तक सीमित नहीं रहता। इससे शिक्षा छूटने, सामाजिक बहिष्कार और आर्थिक संकट जैसी समस्याएं भी बढ़ती हैं।”
–डॉ. किरण कुमार पी.के., मनोचिकित्सक
उम्र के हिसाब से मामले
उम्र — मामले
14 वर्ष — 21
15 वर्ष — 56
16 वर्ष — 127
17 वर्ष — 521
कुल — 725
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