मुख्य सचिव सहित तीन अधिकारियों पर आरोप
हुब्बली। कर्नाटक के पांच खनन ब्लॉकों के अवैध विलय और निलामी को लेकर समाज परिवर्तन समुदाय ने सुप्रीम कोर्ट में न्यायालय की अवमानना याचिका दाखिल की है।
शहर में पत्रकारों से बातचीत करते हुए संस्था के अध्यक्ष एसआर हिरेमठ ने कहा कि 548 पृष्ठों की याचिका में राज्य के वरिष्ठ अधिकारियों—मुख्य सचिव शालिनी रजनीश, वाणिज्य एवं उद्योग विभाग के प्रधान सचिव डॉ. एस. सेल्वकुमार तथा खनन एवं भूविज्ञान विभाग के निदेशक रंगप्पा के खिलाफ आरोप लगाए गए हैं।
सुप्रीम कोर्ट के आदेशों की अवहेलना
हिरेमठ का आरोप है कि 2013 से 2024 तक सुप्रीम कोर्ट के कई आदेशों का पालन नहीं किया गया। बिना अनुमति पांच ब्लॉकों का विलय कर निलामी की गई और ‘सी’ श्रेणी की खानों की सीमाए बदली गईं। लगभग 87.90 हेक्टेयर वन क्षेत्र भी निलामी में शामिल किया गया।
पुनर्वास एवं पुनरस्थापन की प्रक्रिया पूरी किए बिना निविदा आवंटित की गई और अनिवार्य 25 प्रतिशत समाज परिवर्तन समुदाय के योगदान की जगह केवल 10 प्रतिशत वसूला गया। इन बिंदुओं का उल्लेख सुप्रीम कोर्ट की केंद्रीय सशक्तिकरण समिति की रिपोर्टों में भी है।
कंपनियों की स्थिति
हिरेमठ ने स्पष्ट किया कि निलामी में सफल रही जेएसडब्ल्यू स्टील लिमिटेड और रामलिंगम कंस्ट्रक्शन कंपनी लिमिटेड को केवल औपचारिक प्रतिवादी बनाया गया है। उनके खिलाफ निंदा का आरोप नहीं है, परन्तु निलामी रद्द होने पर असर उन पर भी पड़ सकता है।
समाज परिवर्तन समुदाय की मांगें
संस्था ने चार प्रमुख मांगें रखी हैं –
अधिकारियों पर निंदा कार्रवाई
विलय व निलामी को असिंधु घोषित करना
निलामी रद्द कर पूर्व स्थिति बहाल करना
खनन व वनों की कटाई पर रोक
पृष्ठभूमि
यह मामला समाज परिवर्तन समुदाय की याचिका से जुड़ा है, जिसमें अवैध खनन के खिलाफ कार्रवाई हुई थी। इसी क्रम में लगभग 30,000 करोड़ रुपए की कर्नाटक माइनिंग एनवायरनमेंट रिस्टोरेशन कॉर्पोरेशन (केएमईआरसी) की स्थापना हुई और 2022 में न्यायाधीश सुदर्शन रेड्डी को इसके प्रमुख नियुक्त किया गया।
अब सुप्रीम कोर्ट में दाखिल अवमानना याचिका की सुनवाई और अदालत का रुख इस पूरे विवाद का अगला अहम चरण होगा।
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