नाले के पानी से ‘साधनकेरे’ का दम घुटासाधनकेरे झील में जाती नालियों का दूषित पानी और झील में फेंका गया कचरा, जिससे जलाशय का प्राकृतिक सौंदर्य और स्वच्छता प्रभावित हो रही है।

10 एकड़ की झील में कचरा और गंदा पानी

दुर्गंध से परेशान लोग, प्रदूषित पानी में ही बोटिंग शुरू

धारवाड़। कभी शहर की खूबसूरती और सुकून का पर्याय रहा साधनकेरे इन दिनों गंदे नाले के पानी और कचरे से कराह रहा है। आसपास के कई इलाकों का सीवेज सीधे झील में पहुंचने से करीब 10 एकड़ में फैली झील का पानी हरा पड़ गया है। प्लास्टिक की बोतलें, पॉलिथीन और अन्य कचरा पानी में तैर रहा है। दुर्गंध इतनी तेज है कि सुबह-शाम टहलने आने वाले लोगों को नाक बंद कर गुजरना पड़ रहा है।

पुलिस हेडक्वार्टर, साधनकेरी, मंगलगट्टी प्लॉट, सिद्धार्थ कॉलोनी, केसीडी सर्कल और जर्मन अस्पताल के आसपास के क्षेत्रों का नाले का पानी सीधे साधनकेरे में पहुंच रहा है। लंबे समय से जारी इस समस्या के कारण झील का प्राकृतिक पारिस्थितिकी तंत्र भी प्रभावित हो रहा है। गंदा पानी जलचर जीवों के लिए खतरा बन गया है।

3.75 करोड़ खर्च, फिर भी हाल बेहाल

नगर निगम पार्षद अनिता चळगेरी ने आरोप लगाया कि झील के विकास और उद्यान के सौंदर्यीकरण के लिए पहले 3.75 करोड़ रुपए मंजूर हुए थे। काम शुरू करने वाली लैंड आर्मी संस्था ने कथित तौर पर आधा-अधूरा काम किया। न तो झील की ठीक से गाद निकाली गई और न ही नाले के पानी को झील में आने से रोकने की स्थायी व्यवस्था की गई।

बेंद्रे की प्रेरणा, अब बदबू से बेहाल

स्थानीय लोगों के मुताबिक कभी साधनकेरे का वातावरण बेहद मनमोहक था। सुबह-शाम पक्षियों का कलरव और झील के आसपास का प्राकृतिक वातावरण लोगों को आकर्षित करता था। प्रसिद्ध कन्नड़ साहित्यकार द.रा. बेंद्रे के घर के सामने स्थित यह झील उनके साहित्य सृजन से भी जुड़ी रही है। लोगों का कहना है कि ऐसी ऐतिहासिक और सांस्कृतिक पहचान वाली झील की दुर्दशा रोकना जरूरी है।

गंदे पानी में ही बोटिंग!

सबसे गंभीर स्थिति यह है कि प्रदूषित पानी के बीच बोटिंग भी शुरू कर दी गई है। झील के रुके हुए पानी में मच्छरों और अन्य कीटों के पनपने की आशंका है। बोटिंग के दौरान छोटे बच्चे पानी के संपर्क में आते हैं। स्थानीय लोगों ने इससे स्वास्थ्य संबंधी जोखिम की आशंका जताते हुए बोटिंग की व्यवस्था की समीक्षा करने की मांग की है।

स्थायी समाधान की मांग

स्थानीय निवासियों का कहना है कि केवल झील की सफाई से समस्या खत्म नहीं होगी। आसपास से आने वाले सीवेज को रोकने के लिए डायवर्जन चैनल बनाया जाए और गंदे पानी का वैकल्पिक निकास सुनिश्चित किया जाए। साथ ही झील की नियमित सफाई और वैज्ञानिक तरीके से रखरखाव की व्यवस्था हो।

तत्काल कदम उठाए नगर निगम

साधनकेरे में गंदा पानी आने से दुर्गंध की समस्या बढ़ गई है। इसी कारण यहां आने वालों की संख्या भी कम हो रही है। नाले का पानी झील में आने से रोकने के लिए नगर निगम को तत्काल कदम उठाने चाहिए।
वेंकटेश देसाई, स्थानीय निवासी

 

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By Bharat Ki Awaz

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