दो दशक बाद चित्रदुर्ग की धरती तक पहुंचा ‘भद्रा’ का पानी, गोनूरु झील में छलका किसानों का भाव
2.25 लाख हेक्टेयर सिंचाई का लक्ष्य अभी दूर
परीक्षण के लिए छोड़ा गया 3 टीएमसी पानी 164 किमी का सफर तय कर गोनूरु पहुंचा, लेकिन आगे की राह में अधूरे एक्वाडक्ट, पाइपलाइन, नहर और ड्रिप सिंचाई का अड़ंगा
चित्रदुर्ग। भद्रा हमारे गांव की ओर भी बहेगी और खेतों में समृद्धि आएगी—यह बात बुजुर्गों से सुनते-सुनते कई पीढिय़ां गुजर गईं। अब जब भद्रा का पानी गोनूरु झील तक पहुंचा तो कई ग्रामीणों की आंखें छलक उठीं।
बलघट्ट गांव के देवेंद्र रेड्डी भावुक होकर कहते हैं कि पता नहीं यह सपना है या हकीकत। हमारी आंखों के सामने गोनूरु झील में पानी उतर रहा है। अब उम्मीद है कि यह पानी खेतों तक भी पहुंचेगा।
भद्रा ऊपरी परियोजना के तहत 6 सितंबर को भद्रा जलाशय से चित्रदुर्ग शाखा नहर (सीबीसी) में परीक्षण के तौर पर छोड़ा गया पानी तीन दिन में गोनूरु झील पहुंच गया। जलाशय से अज्जमपुर के पास वाई जंक्शन तक करीब 50 किलोमीटर और वहां से गोनूरु तक 114 किलोमीटर की दूरी तय करते हुए पानी ने कुल 164 किलोमीटर का सफर पूरा किया। आगे का एक्वाडक्ट पूरा नहीं होने के कारण फिलहाल पानी को गोनूरु झील की ओर मोड़ दिया गया।
जश्न के बीच अधूरे सपनों की लंबी सूची
गोनूरु की पहाड़ी से झील में उतरते पानी के वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे हैं। हजारों लोग नहर और झील को देखने पहुंच रहे हैं। जगह-जगह गंगापूजन हो रहा है। लेकिन यह भूलना मुश्किल है कि यह अभी परीक्षणात्मक प्रवाह है।
भद्रा ऊपरी परियोजना दो दशक से निर्माण की धीमी गति से जूझ रही है। लक्ष्य था कि चित्रदुर्ग, चिक्कमगलूरु, तुमकूरु और दावणगेरे जिलों के 12 तालुकों के करीब 2.25 लाख हेक्टेयर क्षेत्र को सिंचाई सुविधा मिलेगी और 698 झीलों को पानी से भरा जाएगा। योजना का मूल उद्देश्य किसानों के खेतों तक ड्रिप सिंचाई के जरिए पानी पहुंचाना था।
फिलहाल चित्रदुर्ग शाखा नहर का एक हिस्सा ही पूरा हुआ है। एक्वाडक्ट पूरा होने के बाद ही दावणगेरे के जगलूरु और तुमकूरु के पावगढ़ तक पानी पहुंच सकेगा। मोलकालमूरु और चल्लकेरे की ओर जाने वाली पाइपलाइन तथा तुमकूरु शाखा नहर का काम भी अधूरा है।

गोनूरु में पानी आया तो खुली गाद की पोल
परीक्षण प्रवाह के करीब 3 टीएमसी पानी से चिक्कमगलूरु के तरीकेरे क्षेत्र की 20 और चित्रदुर्ग की करीब 80 झीलों समेत 100 झीलों को पानी देने की मांग उठी है। समस्या यह है कि अधिकांश झीलें गाद से भरी हैं।
किसानों के अनुसार, गोनूरु झील में पानी पहुंचने के कुछ ही घंटों में चादर चलने लगी। उनका कहना है कि गाद के कारण झील की जलधारण क्षमता घट गई है। आगे की झीलों में भी यही स्थिति रही तो पानी का बड़ा हिस्सा बहकर आंध्र प्रदेश की ओर जाने की आशंका है।

2,500 करोड़ रुपए के भुगतान का सवाल
सीबीसी के निर्माण में लगे 134 से अधिक ठेकेदारों का 2,500 करोड़ रुपए से ज्यादा भुगतान लंबित होने का दावा भी सामने आया है। कुछ ठेकेदारों के काम रोकने और मशीनें हटाने की बात कही जा रही है। परियोजना पर अब तक करीब 12,245 करोड़ रुपए खर्च होने के बावजूद काम पूरा नहीं हो पाया है।
राष्ट्रीय परियोजना का दर्जा भी अधर में
भद्रा ऊपरी परियोजना को राष्ट्रीय परियोजना का दर्जा देने और केंद्रीय सहायता को लेकर भी लंबे समय से खींचतान चल रही है। 2022-23 के बजट में 5,300 करोड़ रुपए की घोषणा के बाद परियोजना को राष्ट्रीय परियोजना के रूप में आगे बढ़ाने की प्रक्रिया हुई थी। बाद में केंद्र ने संशोधित प्रस्ताव मांगा और प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के तहत सहायता देने की बात सामने आई।
राज्य सरकार ने अब संशोधित परियोजना के लिए करीब 6,300 करोड़ रुपए की केंद्रीय सहायता का प्रस्ताव भेजा है। हालांकि, योजना की स्वीकृति की प्रक्रिया अभी बाकी है।

ड्रिप सिंचाई शुरू नहीं हुई तो मूल उद्देश्य अधूरा
परियोजना में 21.90 टीएमसी पानी ड्रिप सिंचाई के लिए और 6 टीएमसी झीलों को भरने के लिए निर्धारित बताया गया है। परियोजना की लागत बढक़र करीब 21,167 करोड़ रुपए पहुंच चुकी है। किसानों के खेतों तक ड्रिप सिंचाई पहुंचाने की लागत जोडऩे पर कुल खर्च 25 हजार करोड़ रुपए से अधिक होने की संभावना है।
2.25 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में ड्रिप आउटलेट लगाए जाने हैं, लेकिन इसका काम अभी शुरू नहीं हुआ है। ऐसे में नहर तक पानी पहुंचने के बाद भी खेतों तक पानी पहुंचाने की मूल व्यवस्था अधूरी है।
दावणगेरे बनाम चित्रदुर्ग : पानी पर पुराना विवाद
भद्रा जलाशय के पानी को लेकर दावणगेरे और चित्रदुर्ग के किसानों के बीच भी मतभेद सामने आए हैं। दावणगेरे के किसान 17.40 टीएमसी पानी के आवंटन का हवाला देते हुए चित्रदुर्ग को परीक्षण के लिए पानी देने पर सवाल उठा रहे हैं। वहीं चित्रदुर्ग के किसान भद्रा जलाशय के पानी पर अपना अधिकार बताते हैं।
फिलहाल जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों के प्रयास से यह विवाद शांत है। हालांकि, मुत्तिनकोप्पा से भद्रा बैकवाटर तक बनी नहर में बिजली व्यवस्था से संबंधित पर्यावरण मंजूरी लंबित होने के कारण तुंगा से भद्रा में पानी पहुंचाने की प्रक्रिया भी अटकी हुई है।
गंगापूजन से पहले उठे सवाल
राज्य सरकार की ओर से इस महीने के अंत में मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार के गोनूरु झील पहुंचकर गंगापूजन करने की तैयारी है। पानी आने से किसानों में उत्साह जरूर है, लेकिन स्थानीय स्तर पर सवाल भी उठ रहे हैं—जब झीलों में गाद भरी है, एक्वाडक्ट अधूरा है, ड्रिप सिंचाई शुरू नहीं हुई और पूरी परियोजना अभी अधूरी है, तो क्या केवल परीक्षण प्रवाह से दशकों पुराना सपना पूरा माना जा सकता है?
विश्वेश्वरय्या जल निगम के मुख्य अभियंता एच. रविशंकर के अनुसार, कई कमियों और चुनौतियों के बावजूद परीक्षण प्रवाह सफल रहा है। आगे गोनूरु एक्वाडक्ट का काम पूरा कर दावणगेरे और तुमकूरु जिलों तक पानी पहुंचाने की प्रक्रिया तेज की जाएगी।
फिलहाल नहर में बहता पानी बंजर धरती के लोगों को उम्मीद दे रहा है। लेकिन इस उम्मीद को स्थायी समृद्धि में बदलने के लिए परीक्षण प्रवाह से आगे बढक़र पूरी परियोजना को जमीन पर उतारना सबसे बड़ी चुनौती बनी हुई है।
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