बारिश के मौसम में ही 710 गांव प्यासे!तुंगभद्रा बांध।

जलाशयों और तालाबों में घटा पानी

561 गांवों में निजी बोरवेल का सहारा

149 गांव टैंकरों पर निर्भर

हुब्बल्ली। कर्नाटक में बारिश के मौसम के दौरान ही पेयजल संकट दस्तक दे चुका है। राज्य के 710 गांवों में पानी की समस्या सामने आई है। इनमें 561 गांवों में किसानों के बोरवेल किराए पर लेकर पानी की आपूर्ति की जा रही है, जबकि 149 गांवों में टैंकरों से पानी पहुंचाया जा रहा है। जलस्रोतों और भूजल स्तर में सुधार नहीं होने से आने वाली गर्मियों में संकट और गहराने की आशंका है।

राज्य में मानसून की अनियमितता का असर जलस्रोतों पर साफ दिखाई दे रहा है। सरकार ने इस वर्ष 150 से अधिक तालुकों को सूखाग्रस्त घोषित किया है। बारिश होने के बावजूद कई इलाकों में तालाबों में पर्याप्त पानी जमा नहीं हुआ और भूजल पुनर्भरण भी अपेक्षित स्तर पर नहीं हो सका।

पीने को पानी नहीं, उपयोग के लिए भी इंतजार

कई ग्रामीण क्षेत्रों में घरेलू उपयोग के पानी की आपूर्ति नियमित नहीं है। कुछ स्थानों पर सप्ताह में केवल एक बार पानी मिलने की स्थिति बताई जा रही है। पेयजल के लिए कई गांवों में आरओ प्लांट पर निर्भरता बढ़ी है।

भूजल स्तर लगातार नीचे जाने से बोरवेल भी जवाब देने लगे हैं। विशेषकर मैदानी इलाकों (बयलुसीमे) और कल्याण कर्नाटक क्षेत्र के जिलों में गर्मी के दौरान पेयजल संकट बढऩे की आशंका जताई जा रही है।

561 गांवों में बोरवेल किराए पर

पानी की तत्काल जरूरत पूरी करने के लिए प्रशासन ने 561 गांवों में किसानों के निजी बोरवेल किराए पर लिए हैं। वहीं 149 गांवों में टैंकरों के जरिए पानी पहुंचाया जा रहा है। मौजूदा स्थिति यह संकेत दे रही है कि केवल गर्मियों में राहत उपाय शुरू करने के बजाय अभी से जल संरक्षण और जलस्रोतों के पुनर्भरण पर काम करना जरूरी है।

जेेजेएम का काम भी अधूरा

हर ग्रामीण परिवार तक नल से पानी पहुंचाने के उद्देश्य से शुरू की गई जल जीवन मिशन (जेेजेएम) योजना के तहत कई स्थानों पर काम अब भी लंबित है। निर्धारित अवधि बीतने के बावजूद अनेक गांवों में नियमित जलापूर्ति शुरू नहीं हो सकी है।

पंचायत राज विभाग ने लंबित कार्यों की पहचान कर उन्हें मार्च 2027 के अंत तक पूरा करने के निर्देश दिए हैं। इसका उद्देश्य अगले वर्ष अप्रेल-मई की गर्मी से पहले ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल व्यवस्था मजबूत करना है।

हेमावती का पानी बनेगा उम्मीद

तुुमकूरु सहित मैदानी इलाके के जिलों में एत्तिनहोले परियोजना के पानी को लेकर भी उम्मीद बनी हुई है। नवंबर तक तुमकूरु पहुंचने की बात कही जा रही है। हालांकि दीर्घकालीन समाधान के लिए तालाबों में जल संचयन, वर्षाजल संरक्षण, भूजल पुनर्भरण और लंबित पेयजल योजनाओं को समय पर पूरा करना जरूरी होगा।

 

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By Bharat Ki Awaz

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