पुरानी बंदूकों के भरोसे जंगल की रखवालीएआई तस्वीर।

कर्नाटक वन विभाग के पास 2,186 हथियार, ज्यादातर 70-80 साल पुराने

3,911 पद खाली, आधुनिक वाहन-तकनीक की भी कमी

दावणगेरे। कर्नाटक के जंगल और वन्यजीवों की सुरक्षा की जिम्मेदारी संभाल रहा वन विभाग पुराने हथियारों, सीमित वाहनों और भारी कर्मचारियों की कमी के बीच काम कर रहा है। दूसरी ओर वन तस्कर और शिकारी आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल कर रहे हैं। ऐसे में वनकर्मियों के सामने जंगल और वन्यजीवों की सुरक्षा के साथ अपनी जान बचाने की चुनौती भी बनी हुई है।

वन विभाग के आंकड़ों के अनुसार राज्य के 13 वन क्षेत्रों में लाखों हेक्टेयर जंगल की सुरक्षा के लिए कुल 2,186 हथियार उपलब्ध हैं। इनमें बड़ी संख्या 70 से 80 वर्ष पुराने मॉडल की है। इनमें 897 डबल बैरल गन, 357 .315 राइफल, 23 सिंगल बैरल और 11 .303 राइफल शामिल हैं। इनके अलावा 271 प्वाइंट राइफल, 521 प्वाइंट डबल राइफल, 51 नौ एमएम पिस्तौल और 51 रिवॉल्वर हैं। विभाग के अनुसार इनमें से कई हथियार आपात स्थिति में त्वरित कार्रवाई के लिहाज से पर्याप्त नहीं हैं।

गश्त के लिए सिर्फ 444 वाहन

हथियारों के साथ वाहनों की भी कमी है। विभाग के पास कुल 444 वाहन हैं, जिनमें 226 जीप और 209 मोटरसाइकिल हैं। ट्रक सिर्फ छह और नावें तीन हैं। बेलगावी, चामराजनगर, चिक्कमगलूरु, कैनरा, मैसूरु और शिवमोग्गा जैसे दुर्गम वन क्षेत्रों में पुराने वाहनों से समय पर घटनास्थल तक पहुंचना चुनौतीपूर्ण हो जाता है।

विशेषज्ञों के अनुसार विभाग को आधुनिक हथियारों के साथ नाइट-विजन उपकरण, निगरानी तकनीक, 4-4 ऑल-टेरेन वाहन, रेस्क्यू एंबुलेंस और आधुनिक अग्निशमन उपकरणों की जरूरत है।

हर दो में से एक पद खाली

वन विभाग में कर्मचारियों की कमी भी गंभीर है। स्वीकृत 8,171 पदों में से सिर्फ 4,260 पद भरे हैं, जबकि 3,911 पद यानी करीब 48 फीसदी पद खाली हैं। इनमें 5,494 स्वीकृत वनरक्षक पदों में 2,163 और 1,892 वन निरीक्षक पदों में 1,511 पद रिक्त हैं। 785 क्षेत्र वनाधिकारी पदों में भी 237 पद खाली हैं।

भर्ती की प्रक्रिया भी जारी है

अग्रिम पंक्ति के कर्मचारियों को जरूरत के मुताबिक हेलमेट, गमबूट, सुरक्षा जैकेट और संचार उपकरण उपलब्ध कराए गए हैं। वनरक्षक, वन निरीक्षक और क्षेत्र वनाधिकारियों की भर्ती की प्रक्रिया भी जारी है।
रामलिंगा रेड्डी, वन मंत्री

 

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