बारिश में 33 प्रतिशत कमी, दिसंबर तक 95 ग्राम पंचायतों के 146 गांवों में पेयजल संकट की आशंका
उडुपी। उडुपी जिले में इस बार पेयजल संकट से निपटने के लिए धन की कमी नहीं, बल्कि पानी की कमी सबसे बड़ी चुनौती बन गई है। जिला स्तर पर करीब 6 करोड़ रुपए और प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र में 1-1 करोड़ रुपए पेयजल आपूर्ति के लिए आरक्षित हैं। लेकिन बारिश में भारी कमी के कारण जलस्रोत सूखने लगे हैं। ऐसे में सवाल है कि उपलब्ध धन से पानी लाया कहां से जाए।
1 जून से 21 सितंबर तक जिले में 3,913 मिमी सामान्य बारिश होनी थी, लेकिन केवल 2,619 मिमी बारिश दर्ज हुई। यानी 33 फीसदी बारिश कम हुई। ब्रह्मावर और उडुपी तालुकों में बारिश की कमी अधिक रही है। अगस्त में ही बारिश कमजोर पडऩे से आगामी गर्मी में स्थिति गंभीर होने की आशंका है।
95 ग्राम पंचायतों पर संकट की आशंका
जिला पंचायत के आकलन के मुताबिक कार्कल, कुंदापुर, उडुपी, बयंदूर, ब्रह्मावर, कापु और हेब्री तालुकों की 95 ग्राम पंचायतों के 146 गांवों में दिसंबर तक पेयजल संकट उत्पन्न हो सकता है। आगे बारिश कम रही तो प्रभावित गांवों की संख्या बढ़ सकती है।
राज्य सरकार ने तीसरे चरण में उडुपी जिले के ब्रह्मावर तालुक को सामान्य सूखा प्रभावित घोषित किया है। फिलहाल जिले में पेयजल की गंभीर समस्या नहीं है, लेकिन प्रशासन ने सभी ग्राम पंचायतों को जलस्रोतों और पेयजल उपलब्धता की हर सप्ताह समीक्षा कर रिपोर्ट देने के निर्देश दिए हैं।
योजनाएं बन रही हैं, पानी कहां से आएगा
जल जीवन मिशन सहित विभिन्न पेयजल योजनाओं पर काम चल रहा है, लेकिन जलस्रोतों में पर्याप्त पानी नहीं होने से इनके सामने भी चुनौती है। विशेषज्ञों ने तालाबों और कुओं की गाद निकालने, जलस्रोतों का संरक्षण करने तथा उपलब्ध पानी का सीमित उपयोग करने की सलाह दी है।
अब जिले की उम्मीद रबी की बारिश पर टिकी है। अच्छी बारिश हुई तो हालात सुधर सकते हैं, लेकिन फिलहाल इसकी कोई निश्चितता नहीं है।
उडुपी जिला पंचायत के सीइओ प्रतीक बायल ने कहा कि फिलहाल अनुदान की कमी नहीं है और पेयजल आपूर्ति को प्राथमिकता दी जा रही है। ग्राम पंचायतों को जलस्रोतों की लगातार निगरानी के निर्देश दिए गए हैं।
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