40 साल तक निजी संचालक को सार्वजनिक परिसंपत्तियों का नियंत्रण देना ‘वर्चुअल हैंडओवर’
सीसीपी पार्षद जैक सुखीजा का आरोप
पणजी। कैप्टन ऑफ पोर्ट्स की ओर से जेट्टियों और संबंधित सुविधाओं के संचालन एवं रखरखाव के लिए जारी टेंडर को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। सीसीपी (पणजी शहर का निगम) पार्षद जैक सुखीजा ने टेंडर तत्काल रद्द करने की मांग करते हुए आरोप लगाया कि 30 साल की प्रस्तावित रियायत, जिसे 10 साल और बढ़ाया जा सकता है, सार्वजनिक परिसंपत्तियों को लंबे समय के लिए निजी संचालक के हवाले करने जैसी है।
पणजी में मंगलवार को पत्रकारों से बातचीत में सुखीजा ने पूछा कि जेट्टियों का नियंत्रण निजी संचालक को अधिकतम 40 साल तक देने की जरूरत क्यों है। उन्होंने कहा कि टेंडर में 10 जेट्टियां शामिल हैं। उनके अनुसार कला अकादमी, कैंपल और भगवान महावीर गार्डन में प्रस्तावित तीन नई जेट्टियों के रखरखाव को भी इसी व्यवस्था में शामिल किया जा सकता है।
सुखीजा ने वित्तीय प्रावधानों पर भी सवाल उठाए। उनका आरोप है कि अधिकांश खर्च सरकार वहन करेगी, जबकि निजी संचालक की मरम्मत संबंधी जिम्मेदारी पांच लाख रुपए तक सीमित रखी गई है। उन्होंने कहा कि सार्वजनिक धन से तैयार ढांचे से होने वाले राजस्व का लाभ निजी संचालक को मिल सकता है।
उन्होंने टेंडर में कैसीनो और कैसीनो से जुड़ी संस्थाओं को बोली से बाहर रखने की शर्त पर भी सवाल उठाया। सांता मोनिका जेट्टी का उदाहरण देते हुए उन्होंने शांता इंफ्राटेक के स्वामित्व में कथित बदलाव का उल्लेख किया और मांग की कि भविष्य में सफल बोलीदाता के कैसीनो-संबद्ध कंपनी द्वारा अधिग्रहण की स्थिति से निपटने के लिए भी स्पष्ट सुरक्षा प्रावधान हों।
सुखीजा ने मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत को पत्र लिखकर टेंडर रद्द करने, सार्वजनिक परामर्श कराने और निर्णय से पहले उचित पर्यावरणीय प्रभाव आकलन की मांग की है।
इस अवसर पर मौजूद आप गोवा अध्यक्ष वाल्मीकि नाइक ने भी आरोप लगाया कि सरकारी धन से विकसित बुनियादी ढांचे का लाभ बाद में निजी हितों को पहुंच सकता है। उन्होंने प्रस्तावित यॉट डॉकिंग मरीना सहित अन्य परियोजनाओं पर भी सवाल उठाए।
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