सफाई से आगे अब कचरा रोकने की मुहिमइंद्राली रेलवे स्टेशन पर 100वें सफाई अभियान के दौरान स्वच्छता में जुटे स्काउट्स एवं गाइड्स के विद्यार्थी।

इंद्राली स्टेशन पर 10 साल में 100 सफाई अभियान

गांवों को कचरामुक्त बनाने की पहल

बच्चों से पंचायतों तक बढ़ रही भागीदारी

उडुपी। स्वच्छता की मुहिम अब केवल सडक़, रेलवे स्टेशन या नदी किनारे सफाई तक सीमित नहीं रह गई है। उडुपी जिले में एक ओर भारत स्काउट्स एंड गाइड्स पिछले 10 वर्षों से इंद्राली रेलवे स्टेशन पर नियमित सफाई अभियान चलाकर बच्चों में स्वच्छता की आदत विकसित कर रहे हैं, वहीं दक्षिण कन्नड़ जिले के मूडबिदरी स्थित आल्वास शिक्षा प्रतिष्ठान ने गांवों से निकलने वाले कचरे को नदी तक पहुंचने से पहले रोकने की पहल शुरू की है। दोनों अभियानों का साझा संदेश है—कचरा साफ करने से ज्यादा जरूरी है, उसे पैदा होने और जलस्रोतों तक पहुंचने से रोकना।

भारत स्काउट्स एंड गाइड्स की उडुपी जिला समिति ने 2 अक्टूबर को इंद्राली रेलवे स्टेशन पर अपना 100वां सफाई अभियान पूरा किया। वर्ष 2016 में शुरू हुई इस पहल में शुरुआत में 10-15 स्काउट्स, गाइड्स, रोवर्स और रेंजर्स शामिल होते थे। अब हर माह 60-75 विद्यार्थी नियमित रूप से स्टेशन की सफाई में भाग लेते हैं। सितंबर में 18 स्कूल-कॉलेजों के 212 विद्यार्थियों ने अभियान में हिस्सा लिया।

समिति के अनुसार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी इंद्राली स्टेशन पर विद्यार्थियों की नियमित सफाई गतिविधि की सराहना की है। अभियान का उद्देश्य बच्चों में स्वच्छता को आदत बनाना है, ताकि इसका असर घर और पूरे समाज तक पहुंचे। कापु, कोडी और मलपे समुद्र तटों पर भी नियमित सफाई अभियान चलाए जा रहे हैं। कुंदापुर रेलवे स्टेशन पर भी सितंबर से ऐसी पहल शुरू की गई है।

सफाई से आगे अब कचरा रोकने की मुहिम
गांवों में कचरा प्रबंधन और नदी संरक्षण के लिए जागरूकता अभियान चलाते विद्यार्थी व स्वयंसेवकों का एआई फोटो।

इसी सोच को गांवों तक ले जाते हुए आल्वास शिक्षा प्रतिष्ठान ने ‘हमारा गांव, कचरा मुक्त गांव और नदी में कचरा नहीं’ अभियान शुरू किया है। इसके तहत ‘स्वच्छ ग्राम’ प्रतियोगिता होगी। कचरा पृथक्करण, प्लास्टिक नियंत्रण, स्वच्छता व्यवस्था, जनभागीदारी और जलस्रोतों की सुरक्षा को इसके प्रमुख आधार बनाया गया है।

विद्यार्थियों, युवाओं और आम जनता को ‘स्वच्छता योद्धा’ बनाकर लघु फिल्म प्रतियोगिता और ‘रसवत्तादा (दिलचस्प) रिपोर्टर’ जैसी गतिविधियों से आकर्षित किया जा रहा है। जनवरी 2027 में दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन प्रस्तावित है, जिसमें पंचायतें कचरा प्रबंधन के अपने मॉडल, चुनौतियां और उपलब्धियां साझा करेंगी। नदियों में प्लास्टिक और कचरा कम करने वाले गांवों को ‘स्वच्छ ग्राम पुरस्कार’ देने की योजना है।

इनका कहना है

स्वच्छ स्टेशन उडुपी आने वाले लोगों पर अच्छा पहला प्रभाव डालता है। बच्चों में विकसित स्वच्छता की आदत घर और पूरे समाज तक पहुंचती है।
–सुमना शेखर, सहायक आयोजन आयुक्त, भारत स्काउट्स एंड गाइड्स

अविभाजित दक्षिण कन्नड़ जिले को केंद्र बनाकर अभियान चलाया जा रहा है। इसमें ग्राम पंचायतों, स्थानीय प्रशासन, शिक्षण संस्थानों, विद्यार्थियों, कचरा प्रबंधन कार्यकर्ताओं और पर्यावरण विशेषज्ञों के साथ सैकड़ों स्वयंसेवक जुड़ रहे हैं।
–विवेक आल्वा, ट्रस्टी, आल्वास शिक्षा प्रतिष्ठान

 

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By Bharat Ki Awaz

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