कान में टैग लगाने से मिलेगी मुक्ति
मुंह की तस्वीर से 95 प्रतिशत से अधिक सटीक पहचान
अब तक 10 हजार गायों का डिजिटल रिकॉर्ड तैयार
हुब्बल्ली। कर्नाटक में पशुओं की पहचान और प्रबंधन व्यवस्था में बड़ा बदलाव होने जा रहा है। राज्य सरकार का ‘पशु आधार’ अनुप्रयोग जल्द ही पूरे राज्य में लागू करने की तैयारी है। इसके तहत गायों की पहचान के लिए कान में टैग या बाली लगाने की पारंपरिक प्रक्रिया की जगह कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआइ) आधारित मुंह की पहचान तकनीक का इस्तेमाल किया जाएगा।
यह पहल कर्नाटक सरकार के इ-शासन विभाग के कृत्रिम बुद्धिमत्ता प्रकोष्ठ द्वारा भारतीय विज्ञान संस्थान के विशेषज्ञों की मदद से विकसित की जा रही है। इसे किसी सरकारी संस्था की ओर से इस तरह की पहली पहल बताया जा रहा है।
10 हजार गायों का रिकॉर्ड
‘पशु आधार’ के तहत अब तक करीब 10 हजार गायों का डिजिटल रिकॉर्ड तैयार किया जा चुका है। अधिकारियों के अनुसार मुंह की पहचान आधारित प्रणाली 95 प्रतिशत से अधिक सटीकता दे रही है। परियोजना निदेशक श्रीव्यास एच.एम. ने बताया कि पशुपालन विभाग के सहयोग से लगातार पशुओं का आंकड़ा जुटाया जा रहा है। राज्य में एक करोड़ से अधिक पशु हैं और आने वाले चरणों में बड़ी संख्या में पशुओं की तस्वीरें दर्ज की जाएंगी।
टीकाकरण से चोरी तक में मदद
पहले चरण में गाय और बैलों की मुंह की तस्वीरों के जरिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता प्रणाली को प्रशिक्षित किया जा रहा है। आगे अन्य पशुओं को भी इसमें शामिल किया जाएगा।
डिजिटल पहचान से समय पर टीकाकरण, बीमा भुगतान और बीमा दावों की प्रक्रिया आसान होने की उम्मीद है। पशु चोरी होने पर उसके डिजिटल रिकॉर्ड के आधार पर वास्तविक मालिक की पहचान करने में भी मदद मिलेगी।
विश्वसनीय जैवमितीय पहचान व्यवस्था
कृत्रिम बुद्धिमत्ता और कंप्यूटर दृष्टि तकनीक के जरिए विश्वसनीय जैवमितीय पहचान व्यवस्था तैयार की जा रही है। इसका उद्देश्य सरकारी सुविधाओं, बीमा दावों और पशु स्वास्थ्य सेवाओं को वास्तविक पशु मालिकों तक बिना अनावश्यक देरी और प्रशासनिक बाधाओं के पहुंचाना है।
–पंकज कुमार पांडे, प्रधान सचिव, कर्मचारी एवं प्रशासनिक सुधार विभाग
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