सीमावर्ती गांव के 100 श्रमिकों को मिला काम, 35 दिनों से जारी निर्माण कार्य
अब तक 9 लाख रुपए मजदूरी का भुगतान, महिला श्रमिकों को बस यात्रा में भी राहत
औराद (बीदर)। बारिश की कमी और रोजगार के लिए पलायन की मजबूरी के बीच कर्नाटक के सीमावर्ती गांवों के श्रमिकों को स्थानीय स्तर पर काम मिल रहा है। बीदर जिले के औराद तालुक में वीबी-जी राम जी योजना के तहत रोजगार उपलब्ध कराया जा रहा है, वहीं शक्ति योजना के तहत मुफ्त बस यात्रा से महिला श्रमिकों का आवागमन खर्च भी बच रहा है।
तालुक के महाराजवाड़ी के निकट जंगल क्षेत्र में गांव से करीब छह किलोमीटर दूर सीसीटी (कंटूर ट्रेंच) निर्माण का काम चल रहा है। पिछले 35 दिनों से जारी इस कार्य में महिलाओं सहित करीब 100 श्रमिक जुटे हैं। गांव के आसपास रोजगार मिलने से उन्हें काम की तलाश में दूर-दराज के क्षेत्रों में पलायन नहीं करना पड़ रहा है।
मुफ्त बस सेवा से कार्यस्थल तक पहुंचना आसान
महिला श्रमिक सुबह बीदर से आने वाली परिवहन निगम की बस से महाराजवाड़ी के पास पहुंचती हैं। वहां से कार्यस्थल पर जाकर दिनभर काम करती हैं। शक्ति योजना के तहत मुफ्त बस यात्रा की सुविधा से उनका आने-जाने का खर्च बच रहा है।
महिला श्रमिकों का कहना है कि मुफ्त बस सेवा से दूर स्थित कार्यस्थल तक पहुंचना आसान हुआ है। स्थानीय स्तर पर रोजगार मिलने से परिवार की आर्थिक स्थिति को संभालने में भी मदद मिल रही है।
अब तक 9 लाख रुपए मजदूरी का भुगतान
कार्यस्थल के मेट शिवकुमार सादुरे के अनुसार, महाराजवाड़ी क्षेत्र में योजना के तहत लगातार काम कराया जा रहा है। अब तक श्रमिकों को करीब 9 लाख रुपए मजदूरी का भुगतान किया जा चुका है। महिला और पुरुष श्रमिक उत्साह से काम में भाग ले रहे हैं।
बारिश की कमी और पलायन की चुनौती से जूझ रहे सीमावर्ती क्षेत्रों में स्थानीय रोजगार तथा महिलाओं के लिए मुफ्त बस यात्रा की सुविधा श्रमिक परिवारों को आर्थिक राहत दे रही है।
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