दक्षिण कन्नड़ के 250 से ज्यादा स्कूलों में रसोईघर का संकट

छोटी और जर्जर रसोई में बन रहा बच्चों का भोजन

कक्षाओं में रखना पड़ रहा सामान

1.37 लाख विद्यार्थियों को मिलता है मध्याह्न भोजन

मेंगलूरु। दक्षिण कन्नड़ जिले के सरकारी और अनुदानित स्कूलों में मध्याह्न भोजन व्यवस्था के सामने रसोईघरों की कमी बड़ी समस्या बन गई है। जिले के 250 से ज्यादा स्कूलों में रसोईघरों की मरम्मत, विस्तार या नए निर्माण की जरूरत है। कई स्कूलों में रसोईघर जर्जर हैं तो कुछ जगह इतने छोटे हैं कि भोजन सामग्री रखने के लिए कक्षाओं का सहारा लेना पड़ रहा है। इससे प्रधानाध्यापकों और रसोई कर्मचारियों को काफी परेशानी हो रही है।

जिले के 1,038 सरकारी, 261 अनुदानित और 13 मौलाना आजाद मॉडल स्कूलों समेत कुल 1,312 स्कूलों में 1,37,850 विद्यार्थियों को मध्याह्न भोजन दिया जाता है। इनमें 172 स्कूलों में अक्षय प्रतिष्ठान की ओर से तैयार भोजन पहुंचाया जाता है। शेष स्कूलों में परिसर की रसोई में भोजन तैयार होता है। ऐसे में रसोई की बदहाल स्थिति सीधे भोजन व्यवस्था को प्रभावित कर रही है।

2006 के बाद बने रसोईघर भी अब छोटे

जिले में मध्याह्न भोजन योजना वर्ष 2002 में शुरू हुई थी। वर्ष 2006-07 में 806 सरकारी स्कूलों में रसोईघर बनाए गए। इसके बाद 2011-12 में 284 और 2013-14 में 79 रसोईघर बनाए गए। स्कूल विकास समितियों और दानदाताओं के सहयोग से भी कुछ रसोईघर तैयार किए गए। लेकिन पुराने रसोईघरों में कई अब छोटे पड़ गए हैं और कई की हालत जर्जर हो चुकी है। बारिश से क्षतिग्रस्त रसोईघरों की मरम्मत भी लंबित है।

मनरेगा की योजना अटकी

मनरेगा के तहत 40 स्कूलों में रसोईघर बनाने की कार्ययोजना तैयार की गई थी, लेकिन मनरेगा की जगह विबी-जी राम जी योजना लागू होने के बाद नियमों में बदलाव के कारण इन कार्यों को मंजूरी नहीं मिल सकी। इसके अलावा केंद्र से मिलने वाला अनुदान भी पिछले कुछ वर्षों से लंबित बताया गया है।

अक्षर दासोह (मिड डे मील) कर्मचारी संघ की दक्षिण कन्नड़ जिलाध्यक्ष भाव्या ने कहा कि कई स्कूलों में रसोईघर इतने छोटे हैं कि भोजन सामग्री रखने में भी जगह नहीं बचती। अधिक विद्यार्थियों वाले स्कूलों में समस्या और गंभीर है। बच्चों के भोजन के लिए अलग हॉल की भी आवश्यकता है।

नई योजना से समाधान की उम्मीद

दक्षिण कन्नड़ के अक्षर दासोह शिक्षा अधिकारी ज्ञानेश एम.पी. ने बताया कि कुछ स्कूलों में रसोईघर छोटे हैं और कुछ जगह मरम्मत का काम लंबित है। करीब 40 कार्य पहले मनरेगा के तहत प्रस्तावित थे, लेकिन उन्हें मंजूरी नहीं मिल सकी। अब विबी-जी राम जी योजना के माध्यम से अधिक से अधिक रसोईघर बनाने का प्रयास किया जाएगा।

उडुपी में तस्वीर अलग

पड़ोसी उडुपी जिले में फिलहाल रसोईघर को लेकर ऐसी समस्या नहीं है। जिले के 834 सरकारी व अनुदानित स्कूलों में 74,334 विद्यार्थियों को प्रतिदिन मध्याह्न भोजन दिया जाता है। अधिकारियों के अनुसार सभी सरकारी स्कूलों में व्यवस्थित रसोईघर उपलब्ध हैं। वर्ष 2010 के बाद रसोईघरों के साथ भंडार कक्ष भी बनाए गए और वर्तमान में किसी स्कूल के लिए नया रसोईघर या दासोह कक्ष का प्रस्ताव लंबित नहीं है।

 

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By Bharat Ki Awaz

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