सूखे की धरती पर भद्रा का पानी, 45 साल बाद फिर लबालब हुआ आइमंगला तालाबआइमंगला तालाब पर चली चादर।

चित्रदुर्ग शाखा नहर से कई तालाबों और चेकडैमों तक पहुंचा पानी, किसानों में जगी उम्मीद

181 एकड़ के ऐतिहासिक तालाब में बढ़ा जलस्तर, नहरों की मरम्मत और गाद निकालने की मांग

हिरीयूर (चित्रदुर्ग)। कम बारिश के लिए पहचाने जाने वाले कर्नाटक के आइमंगला क्षेत्र में भद्रा ऊपरी जल परियोजना उम्मीद की नई किरण बनकर आई है। शुक्रवार सुबह चित्रदुर्ग शाखा नहर से पानी पहुंचने के बाद आइमंगला गांव का बड़ा तालाब लबालब भर गया। तालाब से अतिरिक्त पानी अब गांव के छोटे तालाब की ओर बह रहा है। लंबे समय से पानी की कमी झेल रहे इस इलाके में जल संरचनाओं के भरने से किसानों और ग्रामीणों में खुशी है।

ग्रामीणों के अनुसार, वर्ष 2022 में करीब 45 साल बाद तालाब का पानी चादर से बहा था। अब भद्रा परियोजना के पानी से गौणहल्ली तालाब, केसी रोप्पा, आदिरालु, हुली तोट्टिलु और सीएन माळिगे के चेकडैम भी भर गए हैं। सूरगोंडनहल्ली तालाब में करीब 90 प्रतिशत पानी जमा हो चुका है, जबकि तवंदी तालाब की ओर भी पानी बह रहा है।

181 एकड़ में फैला ऐतिहासिक तालाब

आइमंगला का ऐतिहासिक महत्व रहा है। माना जाता है कि 975 ईस्वी में नोलंब राजाओं के शासनकाल में यह गांव हरति वंश के अधीन था। पुराने किले के अवशेष आज भी यहां मौजूद हैं। गांव के पास करीब 200 वर्ष पहले 181 एकड़ में बना तालाब आसपास के किसानों की जीवनरेखा था।

तालाब भरने से आसपास के गांवों के खुले कुओं में पानी उपलब्ध होता था। इसके जलग्रहण क्षेत्र में सैकड़ों एकड़ में नारियल और सुपारी के बाग थे। आइमंगला के पान के पत्ते बेंगलूरु और हुब्बल्ली तक प्रसिद्ध थे। बारिश घटने और तालाब में पानी आना बंद होने से बाग सूखने लगे। तालाब का बड़ा हिस्सा झाडिय़ों से भर गया और पेयजल संकट भी गहराता गया।

12 में से सात-आठ तालाबों तक पहुंचने की उम्मीद

ग्रामीणों ने क्षेत्र के तालाबों तक भद्रा परियोजना का पानी पहुंचाने की मांग को लेकर आंदोलन किया था। अब इस दिशा में आंशिक सफलता मिली है। स्थानीय लोगों के अनुसार, क्षेत्र के 12 तालाबों में से सात-आठ तक पानी पहुंचने की संभावना है। इससे खेती और भूजल स्तर को राहत मिलने की उम्मीद है।

सुपारी की खेती बढ़ाने पर चिंता

भद्रा का पानी पहुंचने के बाद कुछ किसान बड़े पैमाने पर सुपारी के पौधे लगा रहे हैं। हालांकि, किसानों और कृषि विशेषज्ञों ने अधिक पानी की जरूरत वाली फसलों के विस्तार पर चिंता जताई है। बब्बूर फार्म स्थित कृषि अनुसंधान केंद्र के वैज्ञानिक किसानों को कम पानी में तैयार होने वाली फसलें अपनाने के लिए जागरूक कर रहे हैं।

किसानों को वर्ष 2019 का संकट भी याद है, जब वाणी विलास सागर का जलस्तर मृत भंडारण स्तर तक पहुंच गया था। उस समय तालुक में करीब 17,000 एकड़ में फैले सुपारी और नारियल के बाग पानी की कमी से सूख गए थे।

नहरों की मरम्मत नहीं हुई तो बर्बाद होगा पानी

किसानों का कहना है कि तालाबों तक पानी पहुंचना ही पर्याप्त नहीं है। कई जगह नहरें क्षतिग्रस्त हैं, जिससे पानी आगे नहीं बढ़ पाता। तालाबों से गाद निकालने और पुराने जल निकासी द्वारों को बदलने की भी जरूरत है। समय पर मरम्मत और रखरखाव नहीं हुआ तो बहुमूल्य पानी बर्बाद हो सकता है। किसानों ने संबंधित विभागों से जल संरचनाओं की सफाई, मरम्मत और रखरखाव का काम जल्द पूरा करने की मांग की है।

 

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By Bharat Ki Awaz

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