चल्लकेरे में चारे-पानी के लिए हाहाकार, पशुओं को बूचडख़ाना भेजने की नौबत का डर
चार जगह जमीन चिह्नित, फिर भी इंतजार
चल्लकेरे (चित्रदुर्ग)। खेत सूखे, चारा खत्म और पानी की किल्लत—सूखे की मार अब किसानों के मवेशियों पर भी भारी पड़ रही है। पशुओं का पेट भरना मुश्किल होने से कुछ किसान उन्हें कसाईखाने (बूचडख़ाना) भेजने की आशंका जता रहे हैं। इसके बावजूद संकटग्रस्त पशुधन को बचाने के लिए प्रस्तावित गोशालाएं अब तक शुरू नहीं हो पाई हैं। सवाल है कि जब पशुओं के सामने रोजी-मौत का संकट है, तो राहत का इंतजार कब खत्म होगा।
चल्लकेरे तालुका में सूखे की स्थिति का जायजा लेने केंद्रीय अध्ययन दल दौरा कर चुका है। सरकार को रिपोर्ट सौंपे जाने की तैयारी है, लेकिन पशुओं के लिए तत्काल राहत की मांग तेज हो गई है। चल्लकेरे और मोलकालमुरु क्षेत्र में गोपालन पर निर्भर आदिवासी परिवारों सहित हजारों किसानों की आजीविका संकट में है।
चार जगह चिह्नित, गोशालाएं नदारद
प्रशासन ने दोड्ड उल्लार्ति, हिरेकेरे कावलु, अज्जनगुडी और चौलूर गेट में गोशालाओं के लिए स्थान चिह्नित किए हैं, लेकिन संचालन शुरू नहीं हुआ।
पशुपालन विभाग के सहायक निदेशक डॉ. पी. श्रीनिवास के अनुसार, तालुक में करीब 47,882 गोवंश और 5.19 लाख से अधिक भेड़-बकरियां हैं। एक गोवंश को रोज औसतन छह किलोग्राम सूखे चारे की जरूरत होती है। ऐसे में चारे का संकट कितना गंभीर है, इसका अंदाजा लगाया जा सकता है।
आदेश के साथ जमीन पर राहत भी जरूरी
तहसीलदार रेहान पाशा ने बताया कि चारों स्थानों पर गोशालाएं शुरू करने का प्रस्ताव भेजा गया है। आदेश मिलने पर चारा, पेयजल और छाया की व्यवस्था की जाएगी।
अखंड कर्नाटक राज्य किसान संघ के संस्थापक अध्यक्ष सोमगुद्दुु रंगस्वामी ने मांग की कि पशुओं को कसाईखाने भेजने की नौबत आने से पहले तत्काल राहत दी जाए। केवल आदेश जारी करना पर्याप्त नहीं, गोशालाओं में चारा-पानी और छाया की व्यवस्था भी सुनिश्चित करनी होगी।
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